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मुस्लिम समाज में पुरुषों के खतने के बारे में सुना होगा किन्तु स्त्रियों का खतना क्यों किया जाता है, जानेंगे तो हैरान रह जायेंगे



हम सभी को प्रथा और रिवाज के नाम पर कई अमानवीय घटनायें सुनने को मिलती हैं,लेकिन बता दें के स्त्री खतना की प्रथा आपको सोचने पर मजबूर कर देगी और 1 से 5 वर्ष तक की छोटी बच्चिओं के गुप्त-अंगो की सुन्नत प्रथा जिसे स्त्री खतना भी कहते हैं।

बता दें के इसमें कुछ औरतें उसके हाथ-पैर पकड़ लेती हैं और एक महिला उसके भगनासा यानि क्लाइटोरल हुड का एक हिस्सा काट देती हैं और उस बच्ची को कई महीनों तक दर्द झेलना पड़ता हैं और कई बार दर्द के कारण बच्चियों की मौत भी हो जाती हैऔ र महिलाओं के खतना की परम्परा अफ्रिका महाद्वीप के केन्या और यूगांडा जैसे कई मुस्लिम देशों में सदियों से चली आ रही है।

वहीं अफ्रीका में युवा लड़कियों की शादी तभी होती है अगर उन्होंने बचपन में खतना करवाया होता है क्योंकि वहां पर लड़कियों का खतना ही उनके कुंआरे और पवित्र होने का प्रमाण माना जाता है और अफ्रीका में एक कहावत मशहूर है कि एक अफ्रीकी महिला को जिंदगी में तीन मौकों पर बेहद तकलीफ से गुजरना पड़ता है।

पहला जब वो महिला छोटी होती है और उसका खतना किया जाता है, और दूसरा शादी के बाद सुहाग की रात को और तीसरा जब वो बच्चे को जन्म देती है।

वहीं महिलाओं का खतना करने के पीछे पुरुषों की मानसिकता भी जिम्मेदार है कि खतना होने से लड़की संसर्ग यानि प्यार के मामले में संवेदनहीन हो जाएगी और विवाह से पूर्व किसी भी पुरुष से संसर्ग करने में दिलचस्पी नहीं लेगी।

पश्चिमी भारत और पाकिस्तान में भी कई मुस्लिम लोग महिला खतना को अपनी परम्परा और पहचान मानते हैं और यही कारण है स्त्रियों का खतना करने का रिवाज यहाँ आज भी जारी है, जबकि मुस्लिमों के प्रामाणिक इस्लामिक धर्मग्रंथों में स्त्री खतना का कहीं भी जिक्र नहीं किया गया।
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