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पेट की भूख रुकने नहीं देती, प्रवासी मजदूर उन्हीं शहरों की तरफ लौटने लगे वापस, जहां से आने में चप्पलें टूट गई थीं.



चीन के वूहान शहर से उत्पन्न होने वाला 2019 नोवेल कोरोनावायरस इसी समूह के वायरसों का एक उदहारण है, जिसका संक्रमण सन् 2019-20 काल में तेज़ी से उभरकर 2019–20 वुहान कोरोना वायरस प्रकोप के रूप में फैलता जा रहा है। हाल ही में WHO ने इसका नाम COVID-19 रखा।

अनलॉक-1 में रोडवेज बस सेवा शुरू होते ही बिना परमीशन व गाइडलाइन को धता बताते संचालक स्लीपर बसें अब दूसरे प्रांतों तक दौड़ाने लगे है। शनिवार को शाम हमीरपुर शहर के बस स्टैण्ड के पास अहमदाबाद जाने के लिये गांवों के 30 प्रवासी मजदूरों डबल डेकर बस से दोबारा काम करने के लिये रवाना हो गये है। प्रवासियों ने बड़े ही उत्साह के साथ कहा कि फैक्ट्री मालिक ने काम पर बुलवाया है। लाक डाउन के बीच तमाम तकलीफें झेलते हुए हजारों प्रवासी अपने घरों को लौटे थे। इधर अनलाक-1 होते ही दूसरे प्रांतों के फैक्टरी संचालक फिर इन लोगों से वापस आने की आरजू मिन्नत कर रहे हैं। शहर के बस स्टैंड पर परछछ गांव निवासी शिवशंकर मिला। उसने कहा कि वह अहमदाबाद में अंजनी कंपनी में धागा बनाने का काम करता रहा है।

उसने बताया कि लाक डाउन में पिछले 9 मई को घर आया था। उसने कहा कि एक महीना होने को आ रहा है। उसके पास जमीन नहीं है। मजदूरी ही सहारा है। यहां रोजगार नहीं मिल रहा है। जो है उसमें परिश्रम अधिक है पैसा कम है। प्रवासी कामगार ने कहा कि परिवार में मां-बाप व भाई, बहन गांव में रहते हैं। काम नहीं करेंगे तो क्या खाएंगे। उसने बताया कि कंपनी से मालिक का फोन आया था कि वह लौट आए। साथ ही कहा कि अगर उसके साथ और लोग आना चाहे तो उन्हें भी ले आए। 

इस पर वह गांव के राजन व मनफूल को भी साथ ले जा रहा है। प्रवासी कामगार ने कहा कि उनके जैसे अन्य गांव के कई लोग वापस जा रहे हैं। प्राइवेट वाहनों से कामगार सूरत, अहमदाबाद, दिल्ली जैसे महानगरों में वापसी कर रोजी रोटी की जुगाड़ करेंगे। प्रवासी कामगार ने कहा कि कोरोना संक्रमण का खतरा तो कम होने वाला नहीं है। बाहर से लौटकर आये तमाम प्रवासियों को दोबारा काम मिलने से उनके चेहरे खुशी से खिल उठे है। लेकिन ये प्रवासी अपने परिवार को घर पर छोड़कर ही यहां से अहमदाबाद के लिये रवाना हुये है। 

प्रवासियों ने बताया कि यहां पैसा कम मिलता हैै लेकिन गुजरात, सूरत और अन्य महानगरों में फैक्ट्री में काम करने पर बीस हजार रुपये जेब में आते थे। प्रवासियों ने बताया कि कोरोना वायरस का संक्रमण तो फैल ही रहा है लेकिन परिवार को पालने के लिये दोबारा काम करने जाना ही पड़ेगा। फैक्ट्री मालिक भी अब उनके आने का इंतजार कर रहे है। प्रवासियों का कहना है कि कुछ महीने वहां काम किया जायेगा, यदि सब कुछ सही रहा तो परिवार को भी वहां ले जायेंगे।
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