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अमेरिका की चीन को सख्‍त चेतावनी, भारत को छेड़ा तो छोड़ेंगे नहीं, यूएस भेज रहा है सेना



जहां एक तरफ दुनिया कोरोना से जूझ रही है, वहीं दूसरी तरफ चीन अपनी विस्‍तारवादी नीति को बढ़ाने में लगा हैं। हालांकि इस समय अमेरिका की उसपर कड़ी नजर है। अमेरिकी विदेश मंत्री माइक पोम्‍पियों ने गुरुवार को ब्रसेल्स फोरम में एक सवाल के जवाब में कहा कि भारत और दक्षिण पूर्व एशिया के लिए चीन एक खतरा बनता जा रहा है। इसको देखते हुए संयुक्त राज्य अमेरिका यूरोप में अपनी सैन्य उपस्थिति कम कर रहा है।

जर्मनी से हटाई सेना, चीन को देंगे जवाब
पोम्पेओ से पूछा गया था कि अमेरिका ने जर्मनी में अपने सैनिकों की संख्या में कमी क्यों की है, जिसका जवाब देते हुए अमेरिकी विदेश मंत्री ने कहा कि अगर अमेरिकी सैनिक वहां नहीं थे तो यह इसलिए हैं कि उन्हें अन्य स्थानों का सामना करने के लिए ले जाया जा रहा था। चीनी कम्युनिस्ट पार्टी 'भारत के लिए खतरा' लग रही है। इसके साथ ही वह वियतनाम, इंडोनेशिया, मलेशिया, फिलीपींस और दक्षिण चीन सागर के खिलाफ भी हरकतों को अंजाम देने में लगी हुई है। अमेरिकी सेना को इन चुनौतियों का जवाब देने के लिए सही तरीके से तैनात किया गया है।

दो साल पहले से तैयारी शुरू

पोम्पेओ ने उल्लेख किया कि ट्रम्प प्रशासन ने दो साल पहले अमेरिकी सेना की एक लंबी रणनीतिक समीक्षा की थी। अमेरिका ने अपने सामने आने वाले खतरों के बारे में बात की थी कि कैसे उसे अपने संसाधनों को बंटना करना चाहिए, जिसमें खुफिया और सैन्य और साइबर शामिल हैं। उन्‍होंने कहा कि इस अभ्यास के भाग के रूप में यह महसूस किया गया था कि रूस या अन्य विरोधियों को रोकने की क्षमता और किसी भी जगह पर कब्जा करने वाले लोगों को किस तरह से रोका जा सकता है।

अमेरिकी विदेश मंत्री ने कहा कि मैंने सिर्फ चीनी कम्युनिस्ट पार्टी से खतरे के बारे में बात की है। भारत के लिए खतरा, वियतनाम के लिए खतरा, मलेशिया, इंडोनेशिया, दक्षिण चीन सागर की चुनौतियों, फिलीपींस के लिए खतरा। हम यह सुनिश्चित करने जा रहे हैं कि हम पीएलए (पीपुल्स लिबरेशन आर्मी) का मुकाबला करने के लिए उचित रूप से तैनात हैं। हमें लगता है कि यह हमारे समय की चुनौती है और हम यह सुनिश्चित करने जा रहे हैं कि हमारे पास ऐसा करने के लिए संसाधन हों।

इससे पहले उन्होंने चीन पर अमेरिका-यूरोपीय वार्ता के गठन की घोषणा की ताकि अटलांटिक गठबंधन को चीन द्वारा उत्पन्न खतरे की समझ हो सके। पोम्पेओ ने कहा कि दोनों पक्षों को चीन की कार्रवाई पर 'एक सामूहिक डेटा सेट' की आवश्यकता है ताकि दोनों एक साथ कार्रवाई कर सकें। चीन की धमकी के बारे में बोलते हुए उन्होंने बीजिंग की दक्षिण चीन सागर गतिविधि और उसकी शिकारी आर्थिक नीतियों के सबूत के रूप में 'भारत के साथ खूनी सीमा टकराव' का हवाला दिया।
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