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क्या बिहार की मस्जिद में हिंदू लड़के की बलि दी गई? खबर का पूरा सच

पड़ताल: बिहार में 'मस्जिद के लिए हिंदू बच्चे की बलि देने' के दावे का पूरा सच
10 मई को मीडिया वेबसाइट, ऑप इंडिया, के एक आर्टिकल में दावा किया गया कि एक नई मस्जिद की ‘ताकत’ और ‘रसूख’ के लिए रोहित जायसवाल नाम के एक लड़के की ‘बलि’ दी गई है. 

दावा
सोशल मीडिया पर एक दावा वायरल हो रहा है कि बिहार के गोपालगंज में ‘मस्जिद को शक्तिशाली करने के लिए’ एक हिंदू बच्चे की बलि दी गई है. ये दावा 9 मई 2020 के बाद से वायरल हो रहा है.

हम दावे में बिना किसी भाषाई सुधार किए, ज्यों का त्यों लिख रहे हैं.

खतरनाक !!
गोपालगंज बिहार की मस्जिद में रमजान में
जानवर की जगह हिंदू लड़के की क़ुर्बानी दी गई
9 मई को ही एक प्रोपेगैंडा वेबसाइट “ऑप-इंडिया” ने ये घटना रिपोर्ट की. आर्टिकल की हेडिंग है

“मस्जिद को शक्तिशाली बनाने के लिए मेरे बच्चे की बलि, पुलिस प्रताड़ना के बाद हमने छोड़ दिया गाँव – हिन्दू परिवार का आरोप.”
गोपालगंज की घटना को रिपोर्ट करता ऑपइंडिया का आर्टिकल (स्क्रीनशॉट-ऑपइंडिया पोर्टल).

“ऑप-इंडिया” ने रिपोर्ट में कटेया के बेलही डीह गांव के निवासी और मृतक के पिता राजेश के हवाले से लिखा है कि 

कुछ मुस्लिम लड़के 28 मार्च 2020 को आए और रोहित को क्रिकेट खेलने के बहाने ले गए. फिर मस्जिद में बलि दी और बाद में किसी भारी चीज़ से बांधकर नदी में फेंक दिया. इस रिपोर्ट में मृतक का नाम रोहित जायसवाल और उम्र 15 वर्ष बताई गई है.

“ऑप-इंडिया” के इस आर्टिकल में लिखी बातें सोशल मीडिया पर कुछ जगह वायरल भी हुई हैं.

पड़ताल

ये जानकारी सही है कि बिहार के गोपालगंज जिले के बेलही डीह गांव में 15 साल के रोहित जायसवाल की मौत हुई है. लेकिन इस पूरे घटना में जांच-पड़ताल के बाद मस्ज़िद के अंदर बलि देने या फिर कोई सांप्रदायिक एंगल होने से बिहार पुलिस ने साफ इंकार किया है.

ये घटना 28 मार्च 2020 की है. 29 मार्च को लड़के की डेडबॉडी पकहां नदी में मिली थी. पुलिस ने मामला दर्ज कर कार्रवाई की है. लेकिन जहां तक बात हिंदू-मुस्लिम एंगल की है, ऐसा कुछ नहीं है. खुद सारण रेंज के DIG समेत सभी आला अधिकारी घटना स्थल पर पहुंचकर मामले की तस्दीक कर चुके हैं.
मामले को और समझने के लिए हमने गोपालगंज में आजतक से जुड़े पत्रकार सुनील तिवारी से संपर्क किया. उन्होंने बताया

मृतक के पिता पकहां घाट पर रेहड़ी लगाते हैं. वहीं पर मृतक और उसके दोस्त खेलते थे. 28 मार्च 2020 के दिन भी ये लड़के साथ नदी पर गए थे. इस दौरान रोहित नदी में डूब गया. बाकी लड़के वहां से भाग गए. अगले दिन बताया कि वो डूब चुका है. पुलिस और स्थानीय लोगों की मौजूदगी में शव ढूंढा गया. ये सारी घटना डेढ़ महीने पुरानी है. लेकिन कुछ लोगों ने इसे हिंदू-मुस्लिम रंग दिया, इसलिए ये दोबारा ख़बरों में आने लगा. जबकि ऐसा कुछ नहीं है. मामला क्राइम का है, सांप्रदायिक नहीं. इस मामले में 6 लोग नामज़द हैं. गिरफ्तार हुए 5 लड़कों में से 4 नाबालिग हैं. उन्हें कोर्ट से बेल मिल गई है. छठा फ़रार चल रहा है.

13 मई 2020 को सारण रेंज के DIG विजय कुमार वर्मा ने खुद घटनास्थल पर जाकर मामले की जांच की. DIG ने जांच के बाद प्रेसवार्ता की. DIG ने साफ कहा कि

राजेश साह के पुत्र की मौत की CID जांच चल रही है. लेकिन इसी घटना से जुड़ी ख़बर “ऑप-इंडिया” और “ख़बर तक” में इस तरह से चलाई गई कि इसका मस्ज़िद के निर्माण से संबंध है. ये सारी बात ग़लत है. मैंने खुद सत्यापन किया है. इस तरह से सामाजिक सौहार्द बिगड़ेगा. “ऑप-इंडिया” और “ख़बर तक” के खिलाफ कटेया थाने में FIR दर्ज की गई है. आगे की कार्रवाई की जा रही है.

कटेया थाना में “ऑप-इंडिया” और “ख़बर तक” के संपादकों के खिलाफ जानबूझकर धार्मिक भावनाएं आहत करने की IPC धारा 295A और आईटी एक्ट की धारा 67 के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है.
“ऑप इंडिया” और “ख़बर तक” की रिपोर्ट पर पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है.

मृतक की पोस्ट मॉर्टम रिपोर्ट भी हमें मिली है. इसमें फेफड़ों और पेट में पानी भरा हुआ पाया गया है. साथ ही आंख और नाक से खून निकलने की बात भी रिपोर्ट में है. आप ये रिपोर्ट नीचे देख सकते हैं.

‘द लल्लनटॉप’ ने रोहित का पोस्ट मॉर्टम करने वाले डॉक्टर अशोक कुमार अकेला से बात की. डॉक्टर ने बताया,

पोस्ट मॉर्टम में मृतक के पेट और फेफड़े से पानी मिला था. श्वास नली(ट्रैकिया) में भी गंदा पानी मिला है, लेकिन यहां किसी तरह की चोट या खून का थक्का जमा नहीं था. आंखों और नाक से खून निकला था. जब पानी में कोई डूबने से बचने की कोशिश करता है तो आंख और नाक के हिस्से में प्रेशर बढ़ जाता है. ऐसे में संभावना रहती है कि इन जगहों से खून निकले. कई बार पानी में गंदगी से भी आंखों को नुकसान पहुंच सकता है. मृतक के शरीर में कोई बाहर से प्रहार हुआ हो या गला वगैरह दबाया गया हो, ऐसा कुछ भी पोस्ट मॉर्टम में नहीं मिला. क्योंकि शरीर के हिस्सों में काफी पानी मिला है, इसलिए संभावना बेहद कम हो जाती है कि बाहर मारकर लाश को पानी में फेंका गया हो.

“ऑप-इंडिया” ने अपनी रिपोर्ट में पिता के हवाले से मस्जिद में बलि देने की बात लिखी है. लेकिन “ऑप-इंडिया” ने ख़बर में मृतक के पिता का जो वीडियो लगाया है, उसमें मस्जिद में बलि देने की बात नहीं है. (आर्काइव लिंक)

जब पत्रकारों ने मृतक की मां से बलि के बारे में पूछा तो उनका जवाब था कि

“बलि की बात हम नहीं कह सकते, क्योंकि हम अपनी आंख से नहीं देखे हैं. हम झूठ नहीं बोलेंगे”

नतीजा
पड़ताल में नतीजा निकला कि गोपालगंज, बिहार के कटेया थाना क्षेत्र में “मस्जिद निर्माण में हिंदू बच्चे की बलि देने का दावा” ग़लत है. बच्चे की लाश नदी से मिली थी. पुलिस की जांच में मस्ज़िद में बच्चे की बलि देने जैसे बात सामने नहीं आई है. प्रशासन ने साफ किया है कि ये मामला सांप्रदायिक नहीं है. इस मामले में हिंदू-मुस्लिम कर भावनाएं भड़का रहे न्यूज़ पोर्टल्स पर केस दर्ज कर लिया गया है. Post Source: Thelallantop
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