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शुक्र का मिथुन राशि में होगा प्रवेश, 01 अगस्त से इन क्षेत्र के लोगों पर बढ़ सकता है संकट

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भारतीय पंचांग के हिसाब से सावन के महीने के बाद भाद्र पक्ष शुरू होगा, इसे भादुआ भी कहते हैं। अंग्रेजी कलेंडर के हिसाब से हर महीने की 30 या 31 तारीख को पुराना महीना खत्म होता है और 1 तारीख को नया महीना शुरू होता है। इस बार 1 अगस्त को शुक्र मिथुन राशि में प्रवेश कर रहा है। सुबह 5:00 बजे शुक्र ग्रह वृषभ राशि से परिवर्तन कर मिथुन राशि में प्रवेश कर रहा है। शुक्र को नवग्रहों में शुभ ग्रह की संज्ञा मिली है और वे वृषभ और तुला राशि के स्वामी हैं। शुक्र के प्रभाव से सांसारिक सुख, ऐश्वर्य और वैवाहिक जीवन पर भी असर पड़ता है। शुक्र ग्रह 1 सितंबर सुबह 2 बजकर 02 मिनट तक इसी राशि में स्थित रहेंगे।

शुक्र की विशेषता एवं प्रभाव

ज्योतिषाचार्य अनीष व्यास ने बताया कि ज्योतिष शास्त्र में शुक्र ग्रह को सौंदर्य, ऐश्वर्य, वैभव, कला, संगीत और काम वासना का कारक माना जाता है। शुक्र ग्रह वृषभ और तुला का मालिक है। मीन राशि में यह उच्च और कन्या राशि में नीच अवस्था में होता है। जिन जातकों की कुंडली में शुक्र ग्रह प्रबल होता है, उनके व्यक्तित्व को शुक्र आकर्षक बनाता है। प्रबल शुक्र के जातक धन और वैभव संपन्न होते हैं। उनका जीवन ऐश्वर्यशाली होता है।

अगर जातक कला क्षेत्र से जुड़ा होता है तो वह उस क्षेत्र में सफलता के नए आयाम छूता है। इसके विपरीत यदि कुंडली में शुक्र ग्रह अशुभ होता है तो उससे जातकों को कई तरह की परेशानियां होती हैं। शुक्र के अशुभ प्रभाव के कारण जातक का जीवन दरिद्रमय हो जाता है। उसे सभी प्रकार के सांसारिक सुख प्राप्त नहीं हो पाते हैं।

इन लोगों के लिए हानिकारक होगा शुक्र का राशि परिवर्तन

फिल्म इंडस्ट्री, फैशन, गीत-संगीत, ललित-कलाओं में शुक्र का प्रतिनिधित्व होता है। मिथुन राशि में पूर्व से ही राहु विद्यमान हैं, शुक्र के राशि परिवर्तन से मिथुन राशि में राहु-शुक्र की युति होगी, जो फिल्म इंडस्ट्री, फैशन, गीत-संगीत, ललित-कलाओं से संबंधित व्यक्तियों के लिए हानिकारक होगी।

शुक्र को प्रबल करने के उपाय

शुक्र ग्रह के शुभ फल पाने के लिए जातक को इसको मजबूत करना होगा। इसलिए ज्योतिष शास्त्र में शुक्र ग्रह की शांति के उपाय बतलाए गए हैं। इनमें विधिनुसार शुक्र यंत्र स्थापना करके उसकी पूजा, शुक्र ग्रह के बीज मंत्र का जाप, शुक्र ग्रह से संबंधित वस्तुओं का दान, शुक्रवार का व्रत, माँ लक्ष्मी जी की पूजा, हीरा रत्न, छह मुखी रुद्राक्ष और अरंड मूल की जड़ धारण करना बताए गए हैं।

शुक्रवार को श्वेत वस्त्र, सौंदर्य सामग्री, इत्र, चांदी, शकर, दूध-दही, चावल, घी, स्फटिक, सफेद पुका दान करें। शुक्रवार के दिन ब्राह्मणों को श्वेत मिष्ठान या खीर खिलाएं। शुक्रवार को मंदिर में तुलसी का पौधा लगाएं। चमकदार सफेद एवं गुलाबी रंग का प्रयोग करें। प्रत्येक शुक्रवार चींटियों को आटा व पिसी शक्कर मिश्रित कर डालें। सफेद गाय को नित्य चारा व रोटी दें। मां लक्ष्मी अथवा मां जगदम्बा की पूजा करें। श्री सूक्त का पाठ करें।

शुक्र की शांति के लिए शुक्रवार के दिन उपवास रखें। शुक्रवार के दिन दही, खीर, ज्वार, इत्र, रंग-बिरंगे कपड़े, चांदी, चावल इत्यादि वस्तुएं दान करें। शुक्र बीज मंत्र “ॐ द्रां द्रीं द्रौं सः शुक्राय नमः” का 108 बार जप करें।
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