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विधानसभा सत्र बुलाने को लेकर अशोक गहलोत ने राज्यपाल को 102 विधायकों की सौंपी सूची, कही ये बात

राजस्थान सियासी घमासानः विधानसभा सत्र बुलाने को लेकर अशोक गहलोत ने राज्यपाल को 102 विधायकों की सौंपी सूची, कही ये बात

राजस्थान में सियासी घमासान फिलहाल थमते हुए नजर नहीं आ रहा है। कांग्रेस और उसके समर्थक विधायकों ने शुक्रवार को राजभवन में चार घंटे से अधिक समय तक धरना दिया। प्रदेश के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने ‘जल्द से जल्द’ विधानसभा सत्र बुलाने की मांग की। इस दौरान मुख्यमंत्री ने राज्यपाल को 102 विधायकों की सूची सौंपी, जिसमें उनसे सत्र बुलाने के लिए नई ओर से अनुरोध किया गया है।

मुख्यमंत्री ने राज्यपाल कलराज मिश्र के रुख पर बीजेपी की भूमिका का आरोप लगाते हुए कहा कि हमने उनसे कल (गुरुवार) एक पत्र के जरिए सत्र बुलाने का अनुरोध किया था और हमने पूरी रात इंतजार किया, लेकिन कोई प्रतिक्रिया नहीं आई। हम अपना बहुमत साबित करने के लिए तैयार हैं। विपक्ष (बीजेपी) को इसका स्वागत करना चाहिए, लेकिन यहां यह अल्टी-गंगा बह रही है।

अशोक गहलोत ने कहा कि राज्य में उल्टी गंगा बह रही है जहां सत्ता पक्ष खुद विधानसभा का सत्र बुलाना चाहता है और विपक्ष के नेता कह रहे हैं कि हम तो इसकी मांग नहीं कर रहे। गहलोत ने राज्यपाल को संवैधानिक मुखिया बताते हुए अपने विधायकों को गांधीवादी तरीके से पेश आने की नसीहत दी। गहलोत ने उम्मीद जताई कि राज्यपाल कलराज मिश्र विधानसभा का विशेष सत्र बुलाने की कांग्रेस सरकार के प्रस्ताव पर जल्द ही फैसला करेंगे।

गहलोत ने कहा- मुझे उम्मीद है राज्यपाल दबाव में नहीं आएंगे
गहलोत ने कहा कि अगर राज्यपाल के कुछ सवाल हैं तो वह सचिवालय स्तर पर समाधान कर सकते हैं। उन्होंने कहा, ‘हमेशा विपक्ष मांग करता है कि विधानसभा का सत्र बुलाया जाए। यहां सत्ता पक्ष कह रहा है कि विधानसभा का सत्र बुलाया जाए जहां दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा। वहीं विपक्ष कह रहा है कि हम ऐसी मांग ही नहीं कर रहे। यह क्या पहेली है। मुझे उम्मीद है कि कलराज मिश्र जिनका अपना एक व्यक्तित्व है और जिनका दिल्ली में भी पक्ष-विपक्ष सम्मान करता रहा है, वह दबाव में नहीं आएंगे क्योंकि उन्होंने संवैधानिक पद की शपथ ली है।’

राजस्थान में बहुमत का जादुई आंकड़ा
साल 2018 के विधानसभा चुनाव के बाद कांग्रेस द्वारा अशोक गहलोत को मुख्यमंत्री बनाए जाने के बाद से ही सचिन पायलट नाराज चल रहे थे। राजस्थान की 200 सदस्यीय विधानसभा में कांग्रेस के पास 107 और बीजेपी के पास 72 विधायक हैं। यदि 19 बागी विधायकों को अयोग्य करार दिया जाता है तो राज्य विधानसभा की मौजूदा प्रभावी संख्या घटकर 181 हो जाएगी, जिससे बहुमत का जादुई आंकड़ा 91 पर पहुंच जाएगा और मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के लिए बहुमत कायम रखना आसान होगा।
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