Space for advertisement

बांस की बोतल, घास की स्ट्रॉ: वो विकल्प जिन्हें इस्तेमाल कर प्लास्टिक को मात दी जा सकती है

बांस की बोतल, घास की स्ट्रॉ: वो विकल्प जिन्हें इस्तेमाल कर प्लास्टिक को मात दी जा सकती है

प्लास्टिक ठोस कचरा है जिसे वातावरण में घुलने में 1000 साल तक का बहुत लम्बा वक्त लगता है. इसके अलावा, करीब एक टन प्लास्टिक से 10 लाख कैरी बैग बनते हैं. नॉन-बायोडिग्रेडेबल होने की वजह से प्लास्टिक मिट्टी, पानी आदि में जल्दी घुलकर ख़त्म नहीं होता और कई हज़ार साल तक वातावरण और उसके जन जीवन को नुकसान पहुंचाता है.

WHO के अनुसार, हर साल प्रदूषण की वजह से करीब 7 मिलियन लोगों की मौत हो जाती है. प्रदूषण की वजह से हवा में ज़हर घुल रहा है. हज़ारों समुद्री जीवों की जान ले रहा है. अब समस्या सामने है, इसके लिए शुरुआत निजी स्तर पर काम करने और अपनी आदतों में बदलाव लाने से शायद सबसे ज्यादा असर हो. प्लास्टिक जो हमारी-आपकी जिंदगी का अहम हिस्सा बन चुका है, उससे छुटकारा करने की पहल तो हम नई आदतों से कर ही सकते हैं.

लिहाज़ा, हम बड़ी-बड़ी थ्योरी या बड़े प्लास्टिक विकल्पों के बारे में बात न करते हुए उन छोटे विकल्पों की बात करेंगे, जिन्हें शायद आप अपने जीवन में लागू कर पायें. इससे प्लास्टिक के खिलाफ एक जंग में तस्वीर बदलने जैसी स्थिति शायद पैदा हो जाए.

बांस से बनी बोतल और टिफ़िन

सोशल मीडिया पर पर कुछ दिनों पहले बांस की बोतल और टिफ़िन ट्रेंड कर रहे थे. यह Tripura Rehabilitation Plantation Corporation Limited का एक हिस्सा है, जिसमें Bamboo Artisanal Bottle Project के तहत इसे त्रिपुरा के झूम खेती करने वाले किसानों को बेहतर आजीविका प्रदान करने के लिए डिज़ाइन किया गया है. इस परियोजना के पीछे IFS प्रसाद राव नाम शामिल हैं, जिन्होंने इस बोतल के ऑर्डर शुरू होने की घोषणा की.
loading...

Post a Comment

0 Comments

Adblock Detected

Like this blog? Keep us running by whitelisting this blog in your ad blocker

Thank you

×
Get the latest article updates from this site via email for free!