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बकरीद पर न हलाल हों बकरे इसके लिए महीनें भर पहले से पेटा इण्डिया ने शुरू किया अभियान



आज से ठीक एक महीनें बाद मुस्लिमों का त्यौहार बकरीद है, उससे पहले द पीपल फॉर द एथिकल ट्रीटमेंट ऑफ एनिमल्स (पेटा) ने एक अभियान शुरू कर दिया है. दरअसल बकरीद पर बेजुबान जानवर बकरों को हलाल ( क़ुरबानी ) दी जाती है, इसी को रोकनें के लिए पेटा ने अभियान शुरू किया है।

न्यूज़ एजेंसी आईएनएस के मुताबिक, बकरीद त्योहार से एक महीना पहले पशु अधिकार संगठन द पीपल फॉर द एथिकल ट्रीटमेंट ऑफ एनिमल्स (पेटा) इंडिया ने बकरों की कुर्बानी देने से रोकने के लिए एक अभियान शुरू किया है।

पेटा ने लखनऊ में कई होर्डिग लगाई हैं, जिस पर लिखा है, “मैं मैं हूं, मांस नहीं, व्यक्तिगत रूप से देखें, शाकाहारी बनें।” पेटा का साफ़ मानना है कि किसी भी त्यौहार के लिए बेजुबान जानवरों को न काटा जाय।

जानकारी के अनुसार, 31 जुलाई को बकरीद है, जिसे इसे ईद-उल-जुहा भी कहते हैं। ईद-उल-फितर के बाद मुस्लिम समुदाय के सबसे बड़े त्‍योहारों में से एक है बकरीद। इस दिन मुसलमानों के घर में कुछ चौपाया जानवरों की कुर्बानी देने की प्रथा है। कुर्बानी देने के बाद इसे तीन भागों में बांटकर इसका वितरण कर दिया जाता है। इसी को रोकने के लिए पेटा एक महीनें पहले से जुट गया है।
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