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इस गांव की हर बेटी आगे चलकर बन जाती है बेटा, इस 'चमत्कार' से साइंस भी गई हार

इस गांव की हर बेटी आगे चलकर बन जाती है बेटा, इस 'चमत्कार' से साइंस भी गई हार

आज हम आप को कुछ नया बताने जा रहे है जिसपर शायद आप को यकींन न हो दरअसल कैरेबियाई देश में एक गांव ऐसा है, जहां लोग एक अजीबोगरीब रहस्यमयी बीमारी से पीड़ित है और यह एक ऐसी बीमारी हैं, जिसके चलते हर 12 साल की लड़की खुद बखुद लड़का बन जाती है अब आप सोच रहे होंगे कि हम मजाक कर रहे हैं या ये किसी तरह का झूठ है लेकिन आपको बता दें कि ये खबर बिलकुल सच है। दुनिया से कटे एक कैरीबियाई गांव में हो रही है ऐसी रहस्यमयी घटना, जहां बच्चे पैदा तो लड़की के शरीर में होते हैं, लेकिन जैसे ही प्यूबर्टी की ऐज में पहुंचते हैं, उनकी पूरी बॉडी एक लड़के में बदल जाती है।

कैरेबियाई देश डोमिनिकन रिपब्लिक में एक छोटा सा गांव हैं जहां लोग सिर्फ12 साल की उम्र में अपने आप लडकियां बन जाती हैं लड़का. जी हांं, यहां ये अजीबोगरीब बीमारी है. हैरान मत होइए ये बिल्कुल सच है. इस अजीबों-गरीब बीमारी से परेशान हैं. लासेलिनास गांव के लोग इस लाइलाज बीमारी से परेशान है.
यहां पैदा होने वाले बच्‍चों में ज्यादा तर काफी तादात ने इन बच्चो को एक रहस्‍यमयी बीमारी से जकड़ रखा है। इस अजीबो गरीब बीमारी के असर से लड़की के तौर पर पैदा हुई बच्‍ची किशोरी धीरे धीरे अपने आप लड़का बन जाती हैं। पता चला है कि इस कैरेबियाई देश के सेलिनास गांव में 12 साल की उम्र में लड़कियों के लड़का बनने की इस लाइलाज बीमारी से लोग बहुत परेशान हैं। इस बीमारी से पीड़ित बच्चों को बहुत से समाज के लोग काफी नीची नजर से देखते हैं। उन्हें समाज में घृणित समझा जाता है। इन बच्‍चों को ‘ग्वेदोचे’ के नाम से भी पुकारा जाता है, जिसका सामान्य अर्थ किन्नरों के लिए इस्‍तेमाल होता है।

अगर चिकित्‍सकों की माने तो ये बीमारी एक आनुवंशिक विकार है और स्‍थानीय भाषा में इससे ग्रस्‍त बच्‍चों को ‘सूडोहर्माफ्रडाइट’ कहते हैं। इस बीमारी में लड़की के तौर पर पैदा हुए कुछ बच्चों के शरीर में धीरे-धीरे पुरूषों के अंग अपने आप बनने लगते है और उनकी आवाज भी भारी होने लगती है। उनके शरीर में वो बदलाव आने शुरू हो जाते हैं जो की उन्हें धीरे-धीरे लड़की से लड़का बना देते हैं।

ये एक दुर्लभ बीमारी जो गांव के हर 90 में से एक बच्‍चे को अपना शिकार बना रही है। ऐसा माना जा रहा है कि इन बच्चों में हार्मोनल एंजाइम की कमी होती है जिसके चलते पहले तो वे बिना किसी स्‍त्री या पुरुष अंग के जन्‍म लेते हैं। इसके बाद लड़की के तौर पर पैदा हुआ बच्‍चा धीरे धीरे पुरुष बनने लगता है। इस बीमारी से जूझ रहे बच्चे समाज से हमेशा कटे कटे रहते हैं और लोग उन्हें घृणा की नजर से देखते है।

यहां आने वाले लोग इस बात से हैरान रह जाते हैं, लेकिन जो लोग इस दर्द को झेल रहे हैं वे ही इसे समझ सकते हैं। यहां जो भी बच्चे इसका शिकार होते हैं उनमें 12 साल की उम्र में लिंग और अंडकोश विकसित हो जाता है जो उनके लड़का बनने की मुख्य वजह बताया जा रहा है। हालांकि विशेषज्ञ इस मामले में कहते हैं कि ये एक तरह का बॉयोलॉजिकल डिस ऑर्डर है जिसे सूडोहर्माफ्रडाइट कहा जाता है।


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