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असलम ने जान पर खेलकर बचाई किरण की अस्मत, 4 साल बाद वो ऐसे उतार दी अहसान



बचपन से लेकर आज तक आपने एक गाना सुना होगा जिसका कोई नही होता उसका तो खुदा है यारो.मुसीबत में पड़ने पर वो ईश्वर हमेशा हमारी मदद के लिए कुछ न कुछ उपाय करता है. आज की हमारी कहानी कुछ इस पर आधारित है जिसे पढ़कर आप भी कहेंगे कि सच मे भगवान है.आज हम आपको पीलीभीत और टनकपुर के बीच मे स्थित हरदयालपुर ग्राम की एक ऐसी ही घटना के बारे में बताने जा रहे है.



इस गांव के पास में काफी घना जंगल पाया जाता है.वही पास में सावित्री देवी अपनी झोपड़ी बनाकर रहती है.अपनी 17 साल की बेटी किरण के साथ सावित्री देवी वहां रहती है. उनके पति 3 साल पहले ही दुनिया छोड़ कर चले गए. कुछ समय पूर्व कुछ गुंडों ने रात्रि के समय उनके मकान पर हमला कर दिया और सावित्री देवी की पुत्री को उठा ले गए.किरण ने अपने बचाव में काफी शोर मचाया लेकिन वह नाकाम रही.उसी समय उनकी ज़िंदगी मे एक आदमी भगवान बनकर आया.


जिस समय गुंडे किरण को उठा के ले जा रहे थे तभी वहां से एक ट्रक गुजर रहा था.ट्रक का ड्राइवर असलम था.उसने ट्रक रोका और जंगल गया और किरण की मदद करने लगा. उसने देखा कि दो दरिंदे किरण के साथ जबरदस्ती कर रहे थे.असलम उनसे लड़ने लगा.तभी पीछे से एक गुंडे ने उसपर वार कर दिया फिर भी असलम ने हिम्मत नही हारी और उन गुंडों को वहां से भगा दिया. किरण को बचाने के चक्कर मे असलम औऱ उसके मित्र को बहुत चोट लग गई और उसे अस्पताल में भर्ती होना पड़ा.

इस घटना को करीब 4 साल बीत गए. एक दिन इत्तेफाक से असलम उसी रास्ते से कही जा रहा था.अचानक से ट्रक में आग लग गयी और बेकाबू हो कर ट्रक खाई में गिर गया. अचानक से आवाज सुनकर सावित्री और किरण वहां पहुंचे.उन्होंने कोशिश कर असलम की जान बचाई. दोनों उसे उठाकर घर ले गयी और डॉक्टर को बुलाकर उसका इलाज करवाया.

जब असलम होश में आया तो किरण को देखते ही वो पहचान गया और किरण भी उसे पहचान गयी.दोनों के आंसू थमने का नाम नही ले रहे थे. उस दिन के बाद से किरण से असलम को अपना भाई बना लिया और हर रक्षाबंधन अब वह असलम को राखी बांधती है.
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