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गरमागरम भुट्टे बेचने के लिए 75 वर्षीय महिला ने लगाईं ऐसी जुगाड़ कि हर कोई रह गया हैरान


दोस्तों इस दुनियां में हर कोई अपनी जीविका चलने के लिए कई तरह के छोटे या बड़े काम करता हैं. लेकिन पिछले कुछ सालो में भारत में जिस हिसाब से तरक्की हो रही हैं और पूरा देश आधुनिकता की ओर बढ़ रहा हैं, उसी रफ़्तार से लोगो का धीरे धीरे काम करने का तरीका भी बदल रहा हैं. अब काम छोटा हो या बड़ा हर कोई इसे और आसान तरीके से करने के लिए टेक्नोलॉजी का सहारा ले रहा हैं. हालाँकि देश और दुनियां में जैसे जैसे ये टेक्नोलॉजी बढ़ते जा रही हैं वैसे वैसे उर्जा की खपत भी लगातार बढ़ती जा रही है. यदि ऐसा ही चलता रहा तो आने वाले समय में इस उर्जा की कमी हो सकती हैं जिससे हमारी फ्यूचर जनरेशन को परेशानियों का सामना करना पड़ सकता हैं.



इसलिए कुछ अच्छे लोगो ने अभी से इस बारे में सोचना शुरू कर दिया हैं और प्राकृतिक संसाधनों से उर्जा लेने की तकनीक भी विकसित कर ली हैं. ऐसी ही एक तकनीक का नाम हैं सोलर उर्जा प्रणाली. इस प्रक्रिया में हम एक बड़ी सी सोलर पेनल के जरिए सूरज से रौशनी लेते हैं और उसे बिजली में परिवर्तित कर देते हैं. ये उर्जा लेने का सबसे सस्ता तरीका भी हैं. हालाँकि हर कोई आज के ज़माने में इसे आजमाता नहीं हैं. यहाँ तक कि कई लोगो को इस अच्छी टेक्नोलॉजी और फ्यूचर में उर्जा बचाने की पड़ी भी नहीं हैं. ऐसे में बेंगलुरु शहर में ठेले पर भुट्टा बेचने वाली एक 75 वर्षीय महिला ने इसका इस्तेमाल बड़ी ही चतुराई से कर सबको हैरत में डाल दिया. अब नतीजा ये हैं कि यह महिला अपनी इस अनोखी जुगाड़ की वजह से इंटरनेट पर वायरल हो रही हैं और लोगो की तारीफें भी बटोर रही हैं.

सेलवंमा नाम की यह महिला बेंगलुरु के विधान सौदा नाम की बिल्डिंग के नीचे पिछले 20 सालो से भुट्टे बेचने का काम कर रही हैं. ये महिला भुट्टों को कोयले के ऊपर सकती हैं. इन कोयलों की आंच और सोले को बरकरार रखने के लिए ये अब तक हाथ के पंखे का इस्तेमाल करती आ रही थी लेकिन अब इन्होने अपने ठेले पर सोलर उर्जा से चलने वाला पंखा लगा रखा हैं. इस तरह से उनकी काफी मेहनत बच जाती हैं और सूर्य से मिली उर्जा से पंखा चलने के कारण कोई खर्चा भी नहीं होता हैं. इस सोलर उर्जा वाली मशीन से पंखा चलने के साथ साथ एक एलईडी बल्ब भी जल जाता हैं.

75 वर्षीय महिला की इस अनोखी जुगाड़ ने कई लोगो का ध्यान अपनी ओर खीचा. लोग महिला की वातावरण के प्रति चिंता और अच्छी सोच की भी तारीफ़ कर रहे हैं. जब किसी ने उनसे पूछा कि उनके दिमाग में ये आईडिया कैसे आया तो उन्होंने बताया कि मैं एक एनजीओ के पास ही रहती हूँ. बूढी हो जाने की वजह से इन भुट्टों को दिनभर सेकना मेरे लिए मुश्किल होता चला जा रहा था. मेरी इस समस्यां को देखते हुए इस एनजीओ ने मुझे ये सोलर उर्जा से चलने वाला पंखा लाकर दे दिया. अब मैं बिना खुद को तकलीफ पहुंचाए आसानी से इन भुट्टो को सेक लेती हूँ.

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