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पाकिस्तान ने कोरोना पर कैसे पा लिया काबू, जबकि दुनिया जूझ रही ?

भारत समेत पूरी दुनिया में अब भी कोरोना का कहर जारी है. हालांकि, पाकिस्तान कोरोना वायरस महामारी पर काबू करता नजर आ रहा है. पाकिस्तान में रविवार को कोविड-19 से मौत के बीते 24 घंटे में सिर्फ चार मामले सामने आए हैं. भारत के पड़ोसी देश में मार्च से अब तक हुई मौतों की यह सबसे कम संख्या है.

कमजोर हेल्थ सिस्टम के बावजूद पाकिस्तान का यह आंकड़ा साबित करता है कि कोरोना वायरस से जंग में पाकिस्तान सही दिशा में आगे बढ़ा है. ‘दि नेशनल कमांड एंड कंट्रोल सेंटर’ के मुताबिक, पाकिस्तान में कोरोना के सिर्फ 591 नए मामले दर्ज किए गए हैं ।

पाकिस्तान में अभी कोरोना पॉजीटिव मरीजों की संख्या 293,261 है, जिनमें से 6,244 लोगों की मौत हुई है. पाकिस्तान में कोरोना वायरस का संक्रमण और उससे होने वाली मौतों का आंकड़ा जून में अचानक से बढ़ गया था. लेकिन इसके बाद संक्रमण और इससे होने वाली मौतों में लगातार गिरावट आई है. हालांकि, ये एक पहेली से कम नहीं है कि पाकिस्तान में कोरोना पर कंट्रोल कैसे हुआ ।

पाकिस्तान की स्थिति में अचानक सुधार ‘ड्रग रेगुलेटरी एजेंसी’ द्वारा चीन की कोरोना वैक्सीन की फाइनल फेज की टेस्टिंग को मंजूरी देने के कुछ दिनों बाद आया है. पाक को उम्मीद है कि अगर चीन की यह वैक्सीन सफल होती है तो निश्चित तौर पर पाकिस्तान इसे पहले हासिल कर लेगा ।


पाकिस्तान के हालात में पहले से काफी ज्यादा सुधार हुआ है. जुलाई के मध्य से पहले यह देश स्पेन और ईरान का साउथ एशियन वर्जन बनता जा रहा था. शुरुआत में वायरस की तबाही से भारी संख्या में लोग संक्रमित हुए और मौत हुईं. मरीजों को एडमिट करने के लिए अस्पतालों में जगह तक खाली नहीं थी ।

ये ऐसा वक्त था जब पाकिस्तान के पैराडेमिक्स मदद की गुहार लगा रहे थे और केंद्र व प्रांत के नीति नियोजक बड़े पैमाने पर लोगों की मौत होने की आशंका से डरे हुए थे. संगीतकार, राजनीतिक नेता, लेखक, डॉक्टर, शिक्षक और सैनिक जैसी प्रमुख हस्तियां वायरस की चपेट में आईं. जबकि सामान्य लोग खुद को असुरक्षित महसूस करने लगे थे. कारोबार ठप पड़ चुके थे. वस्तुओं और सेवाओं का संचार हाशिए पर आ चुका था


लेकिन मध्य जून से मध्य जुलाई के बीच 40 दिनों के भीतर वायरस अचानक हवा में भाप की तरह गायब होता नजर आया. रोजाना संक्रमण के मामले, एक्टिव केस और डेथ टोल ऊपर जाने के बाद अचानक से नीचे आ गए. रिकवरी रेट में भी तेजी से सुधार देखने को मिला ।

13 जून को पाकिस्तान में कोरोना के 6,825 नए मामले दर्ज किए गए थे, जबकि पिछले सप्ताह यहां सिर्फ 634 नए मामले सामने आए हैं. ‘डेली डेथ मीटर’ बताता है कि 19 जून को पाक में 153 लोगों की मौत हुई थी. जबकि पिछले सप्ताह कोरोना से मरने वालों की संख्या सिर्फ 8 है ।


पूरी दुनिया में कोरोना से तबाही अभी थमी नही है. महामारी से रोज हजारों लोगों की मौत हो रही है. अर्थव्यवस्था खतरे के निशान से ऊपर जा चुकी है. जबकि दूसरी ओर पाकिस्तान में घटते मामले सुधरते हालात के गवाह बन रहे हैं. अंतरराष्ट्रीय हवाई यात्राओं को भी ग्रीन सिग्नल मिल चुका है ।

एक समय तक भारत में कोरोना संक्रमितों की संख्या पाकिस्तान से कम थी, लेकिन आज लिस्ट में भारत का नाम पाकिस्तान से काफी ऊपर है. Worldometer की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका और ब्राजील के बाद भारत में कोरोना संक्रमितों की संख्या सबसे ज्यादा है. भारत में कोरोना के अब तक 31 लाख से भी ज्यादा मामले सामने आ चुके हैं, जिनमें से 57 हजार से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है. लिस्ट में पाकिस्तान 16वें स्थान पर है. पाकिस्तान में कोरोना के मामले बांग्लादेश से भी कम है ।

पाकिस्तान सरकार ने आर्थिक और व्यावसायिक गतिविधियों की पूर्ण बहाली की घोषणा कर दी है. इमरान खान ने हाल ही में देश की कुछ सबसे बड़ी निर्माण परियोजनाओं का उद्घाटन किया है. पाक पीएम ने पहले भी पूरी तरह से लॉकडाउन नहीं लगाया था जिसके लिए उन्हें काफी आलोचना का भी सामना करना पड़ा था. यहां तक कि धार्मिक स्थलों को भी बंद नहीं किया गया. दूसरे देशों के मुकाबले पाकिस्तान में लोग WHO और लोकल हेल्थ एक्सपर्ट द्वारा बताई गईं दर्जनों गाइडलाइंस का भी पालन नहीं कर रहे हैं. मास्क पहनने और सोशल डिस्टेंसिंग की अनदेखी की जा रही है. ऐसे में कोरोना वायरस की रफ्तार कम होना हैरानी की ही बात है।

पाकिस्तान में शादी-समारोह के लिए मैरिज हॉल खोल दिए गए हैं और हर किसी के पास रोजाना ढेरों बुकिंग आ रही हैं. अगले महीने से बच्चों के लिए स्कूलों को फिर से खोलने पर विचार किया जा रहा है. बीते चार महीनों से पाकिस्तान के हालात आज जैसे बिल्कुल नहीं थे. पाक ने इसे एक ऐतिहासिक क्षण बताया है. सरकार द्वारा सावधानी बरतने की सलाह को भी बहुत कम ही लोग गंभीरता से ले रहे हैं।
पाकिस्तान में अचानक आए इस बदलाव पर अभी तक हेल्थ एक्सपर्ट, भविष्यवक्ता और यहां तक कि सरकार के खुद के एक्सपर्ट एकमत नहीं हो पाए हैं. हालांकि महामारी की बड़ी मार झेलने वाले खैबर पख्तून प्रांत के एक अधिकारी ने बताया कि मौसम के बदलते मिजाज के कारण पाक में कोरोना सुस्त पड़ा है।

उन्होंने कहा कि यहां ह्यूमिडिटी का लेवल 86 डिग्री तक पहुंच चुका है और तापमान 40 से 45 डिग्री सेल्सियस तक जा चुका है. वायरस के तेजी से ना फैलने का यह बड़ा कारण है. उन्होंने बताया कि ‘एसिम्प्टोमैटिक इंफेक्शन’ की संख्या बढ़ने से कम्यूनिटी के बीच हर्ड इम्यूनिटी का लोकल वर्जन तैयार हुआ, जिससे मामलों में गिरावट आई ।

एक कारण ये भी है कि विटामिन-डी और सूर्य की किरणों के संपर्क में आने से शरीर को बड़ा फायदा पहुंचा है. ये दोनों ही एक्यूट रेस्पिरेटरी इंफेक्शन से शरीर का बचाव करते हैं. शहरी और ग्रामीण दोनों ही क्षेत्रों में अपेक्षाकृत कम जनसंख्या घनत्व है. पाकिस्तान में किसी तरह का सब-वे सिस्टम नहीं है. यहां के सिनेमा और थिएटर भी अपनी एक्टिविटी को लेकर फेमस नहीं हैं. यहां के बाशिंदे आमतौर पर घर से काम और काम से घर की एक सीधी रेखा पर चलते हैं. यहां डोमेस्टिक टूरिज्म भी पूरी तरह से विकसित नहीं है ।


ऐसी भी अटकलें हैं कि चीन बेल्ट और प्रोजेक्ट रोड की वजह से पाकिस्तान की कोरोना से लड़ने में मदद कर रहा है. फिलहाल पाकिस्तान में कोविड-19 अखबारों के दूसरे पन्ने पर चला गया है. देश में अब यह कम महत्वपूर्ण विषय रहा गया है. हालांकि देश आपदा मुक्त हो चुका है, ये समझने के लिए कुछ और महीनों का इंतजार करना होगा ।

इस महामारी ने पहले ही कई भविष्यवक्ताओं को गलत साबित किया है. वायरस ने कई देशों में दोबारा संकट पैदा कर दिया है. पाकिस्तान का हेल्थ सिस्टम भी काफी कमजोर है, इसलिए महामारी को गंभीरता से लेना होगा. अगले कुछ महीनों में यह स्पष्ट हो जाएगा कि क्या वाकई पाकिस्तान के सिर से कोरोना जैसी भयावह महामारी का खतरा टल गया है ।
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