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अमेरिकी मैगजीन ने खोली चीन की पोल, 'गलवान में मारे गए थे 60 से ज्यादा चीनी सैनिक'



एलएसी पर भारत-चीन में जारी तनाव के बीच एक अमेरिकी मैगजीन ने दावा किया है कि भारत के सामने चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग (Chinese President Xi Jinping) की हर चाल नाकाम रही, खासकर चीनी सेना की आक्रामक गतिविधियों के दम पर भारतीय जमीन पर कब्जे की चाल. क्योंकि भारतीय सेना ने बहुत ही बहादुरी से चीनी सेना को आगे बढ़ने से रोक दिया. इस रिपोर्ट में ये भी कहा गया है कि गलवान घाटी में दोनों देशों के सैनिकों के भीच हुई भिड़ंत को लेकर चीन ने पूरी दुनिया से सच्चाई छिपाई. इस भिड़ंत में 60 से भी ज्यादा चीनी सैनिक मारे गए थे.

चीनी हमले के रणनीतिकार हैं जिनपिंग: न्यूजवीक
अमेरिकी मैगजीन न्यूजवीक (The Newsweek) ने भारत-चीन के बीच तनाव की मुख्य वजह शी जिनपिंग को बताया है और कहा कि वो पीएलए (People's Libration Army) की कार्रवाईयों के पीछे के मुख्य रणनीतिकार हैं. शी जिनपिंग पर चीनी कम्युनिस्ट पार्टी की तरफ से दबाव है कि वो भारत के खिलाफ बदला की कार्रवाई करे, जिसके बाद संभव है कि चीनी सेना जिनपिंग के निर्देशों पर फिर से भारतीय क्ष्रेत्र में घुसपैठ की कोशिश कर सकती है. इसके पीछे की सबसे बड़ी वजह चीनी सेना की विफलता के कलंक को धोना है.

पीएलए की किरकिरी से बौखलाया है चीन
रिपोर्ट के मुताबिक, 'पीपल्स लिबरेशन आर्मी के भारत में आक्रामक रूप से बढ़ने की वजह मुख्य रूप से जिनपिंग ही हैं. लेकिन ये योजना पूरी तरह से विफल रही. ऐसे में पीएलए की खासी किरकिरी हो चुकी है. यही वजह है कि चीन चाहते हुए भी पीछे नहीं हट पा रहा है और भारतीय सेना उसे आगे बढ़ने नहीं दे रही है.'

विफलता का दाग धोने के लिए फिर से 'आक्रमण' करेगा चीन!
मैगजीन ने चेतावनी देते हुए लिखा है कि चीनी कम्युनिस्ट पार्टी और उनके अधिकारियों को सीमा पर मिली विफलता एक और अभियान के लिए प्रेरित कर सकती है. चूंकि शी जिनपिंग ही चीन के असली शासक हैं. वो पार्टी के सेंट्रल मिलिट्री कमीशन (Central Military Commission) के चेयरमैन हैं, साथ चीनी कम्युनिस्ट पार्टी (Communist Party of China) के अलावा पीपल्स लिबरेशन आर्मी के भी मुखिया हैं. ऐसे में उनके निर्देशों पर फिर से चीनी सेना भारत पर हमला कर सकती है.

15 जून को 43 से 60 या अधिक चीनी सैनिक हुए थे ढेर: मैगजीन
भारत चीन एलएसी पर चीनी सेना की घुसपैठ को रोकने की कोशिश में भारत के 20 जवान शहीद हुए थे, लेकिन चीनी पक्ष की तरफ से ऐसी कोई जानकारी नहीं आई थी. हालांकि मैगजीन ने दावा किया है कि चीन के कम से 43 सैनिक ढेर हुए थे. हालांकि अन्य स्रोतों के मुताबिक ये संख्या 60 से भी अधिक हो सकती है. फाउंडेशन फॉर डिफेंस ऑफ डेमोक्रेसीज (Foundation for Defense of Democracies) के क्लियो पास्कल के मुताबिक भारतीय सैनिकों की जवाबी कार्रवाई में 60 से ज्यादा चीनी सैनिक हताहत हुए थे. लेकिन बीजिंग में बैठे चीनी आका उसे स्वीकार नहीं कर सकते. इस लेख में भारतीय सेना की हालिया सफलताओं का भी जिक्र है, जिसमें भारतीय सेना ने रणनीतिकार रूप से अहम ऊंचाई वाली चोटियों पर अपनी स्थिति मजबूत कर ली है. खासकर उन जगहों पर, जहां कुछ समय पहले तक चीनी सेना मौजूद हुआ करती थी.
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