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मंगल एवं शनिवार करें यह एक उपाय, हनुमान जी दूर करेंगे जीवन का हर संकट



हिन्दू धर्म में भोलेनाथ से संबंधित यह मत है कि उनकी उपासना करने से वे जल्द प्रसन्न हो जाते हैं और मनोकामना पूर्ण कर देते हैं। लेकिन ग्यारहवें रुद्र माने जाने वाले हनुमान जी भी अपने भक्तों की पुकार जल्दी सुनते हैं।

यदि दिल से उनका जाप किया जाए, उनकी उपासना की जाए, तो हनुमान जी भक्त की हर परेशानी को हल कर देते हैं। कहते हैं कि हनुमान जी स्वयं भी अपने हर भक्त का ख्याल रखते हैं। यदि नियमित उनकी पूजी की जाए, तो वे भक्त पर किसी भी प्रकार का कोई संकट नहीं आने देते।

किंतु अगर आप परेशान है, किसी समस्या में फंसे हैं, आपके कार्य संपन्न नहीं हो पा रहे, या फिर केवल किसी मनोकामना की पूर्ति चाहते हैं, तो हम हनुमान जी से जुड़ा एक ऐसा शास्त्रीय उपाय लाए हैं जो आपकी मदद कर सकता है।

आपको केवल आगे बताए जा रहे निर्देशों का पालन करना है और उसी रूप में उनका प्रयोग करना है। ऐसा करने से हनुमान जी आपकी पुकार अवश्य सुनेंगे। यह उपाय किसी भी मंगलवार या शनिवार के दिन करें। अगर आपकी इच्छा हो तो आप दोनों दिन इस उपाय को कर सकते हैं।

इसके लिए मंगलवार या शनिवार को ब्रह्म मुहूर्त में उठें। स्नानादि करके किसी पीपल के पेड़ से 11 पत्ते तोड़ लें। ध्यान रखें पत्ते पूरे होने चाहिए, कहीं से टूटे या खंडित नहीं होने चाहिए।

अब इन 11 पत्तों पर आपको ‘श्रीराम’ नाम लिखना है। इसके लिए स्वच्छ जल में कुमकुम या अष्टगंध या चंदन मिलाकर, तैयार किए गए घोल के प्रयोग से श्रीराम का प्रत्येक पत्ते पर नाम लिखें। मान्यता है कि अपनी पूजा में श्रीराम का नाम होने से हनुमान जी प्रसन्न होते हैं।

एक और बात, यदि संभव हो तो जब तक आप पत्तों पर नाम लिख रहे हैं, साथ ही साथ हनुमान चालीसा का पाठ भी करें। जब सभी पत्तों पर श्रीराम नाम लिख लें, उसके बाद राम नाम लिखे हुए इन पत्तों की एक माला बनाएं। इस माला को किसी भी हनुमानजी के मंदिर जाकर वहां बजरंगबली को अर्पित करें।

इस उपाय को आप जब तक चाहे प्रति मंगलवार एवं शनिवार को कर सकते हैं। शनिवार के दिन किया गया यह उपाय, शनि दोषों से मुक्त कराता है। साथ ही आपकी हर मनोकामना भी पूरी होगी।

लेकिन इस उपाय को करते समय कुछ बातों का विशेष ध्यान रखें, जैसे कि उपाय करने वाला भक्त किसी भी प्रकार के अधार्मिक कार्य न करें। अन्यथा इस उपाय का प्रभाव निष्फल हो जाएगा। उचित लाभ प्राप्त नहीं हो सकेगा। साथ ही अपने कार्य और कर्तव्य के प्रति ईमानदार रहें।
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