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क्या आप जानते हैं पेन के ढक्कन में छेद क्यों होता है ? अगर नहीं जानते तो जान लीजिये



पढ़ने लिखने वाले और हिसाब किताब रखने वाले लोग पेन का इस्तेमाल करते हैं। भले ही जमाना डिजिटल हो गया हो लेकिन पेन का इस्तेमाल अब भी कम नहीं हुआ है। पेन एक समय फैशन के रूप में माना जाता था। लोग इसे अपने शर्ट की जेब में लगाकर चलते थे। जो कोई भी लेखक होता था अगर उसके पास पेन नहीं होती तो लोग कहते थे कि किस बात का लेखक है। पेन की कई खासियत है। जैसे-जैसे अविष्कार हुआ वैसे वैसे पेन भी बदलता रहा है। बॉल पेन से लेकर फाउंटेन पेन तक पेन ने विकास का लम्बा सफर तय किया है।


अगर पेन के स्वरुप की बात की जाए तो यह लगभग 20 से 30 सेमी की पतली सी एक नली होती है जिसमे स्याही भरी होती है। पेन को अगर ऊपरी तौर पर देखा जाए तो इसके अंतिम छोर पर एक छेद होता है। आप लोग पेन तो प्रयोग में लाये होंगे लेकिन शायद ही इस बारें में जानते होंगे कि आखिर पेन के आखिरी छोर या कैप पर छेद क्यों होता है। आज हम इस आर्टिकल के जरिये जानेंगे।
पेन का ढक्कन



अक्सर देखने को मिल जाता है कि पेन के कैप यानि ढक्कन पर पीछे की तरफ छेद होता है। इसके पीछे आम अवधारणा है कि पेन की ढक्कन में इसलिए छेद किया जाता है ताकि स्याही सूखे न। लेकिन यह अवधारणा सही नहीं है। क्योंकि इससे पेन की स्याही सूख भी सकती है और नहीं भी सूख सकती है। यह भी कहा जाता है कि ढक्कन में छेद होने से यह पेन को ढक्कन से बंद करने पर बाहर और कैप के अंदर निब की स्याही के दबाव को बराबर बनाये रखता है।

यह अवधारणा भी सही साबित नहीं होती है। क्योंकि चुटपुटी पेन और घुमावदार कैप वाली पेन में यह बात उसमे लागू ही नहीं होती है। इसके अलावा लोगों को लगता है कि पेन में छेद कंपनियां पेन को अच्छा दिखाने के लिए करती है। लेकिन ऐसा नहीं होता है।
क्या है मूल कारण

पेन के दोनों छोर पर छेद सुरक्षा के लिहाज से दिया जाता है। अगर कोई बच्चा पेन की कैप या पेन को ही निगल जाए तो छेद रहने से इससे उसके अंदर ऑक्सीजन पास होती रहेगी और यह बच्चों के लिए घातक सिद्ध नहीं होगी। पेन के ढक्कन और पेन के पीछे छेद करने का यही एकमात्र सुरक्षा के लिहाज से मेन कारण होता है। अक्सर देखा गया है लिखते समय बच्चे पेन को ढक्कन की तरफ से चबाने लगते हैं और गलती से ढक्कन पेट में चली जाती है।

ढक्कन में पीछे छेद रहने के कारण सामान्यता अंदर जाने वाली ऑक्सीजन रूकती नहीं है और जान का कोई नुक्सान नहीं होता है। कुछ देर तक सांस छेद के जरिये जाती रहे और तब बच्चे को डॉक्टर के पास लेकर पहुंचा जा सके। इसलिए पेन के निर्माताओं ने ऐसा किया।
वैज्ञानिक कारण भी ही इसके पीछे

पेन की ढक्कन में छेद इसलिए भी किया जाता है ताकि ढक्कन को पेन से बंद करने पर इसके अंदर ऑक्सीजन की प्रवाह बनी रहे और कार्बनडाइऑक्साइड के दबाव के कारण स्याही बाहर न बहे।
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