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अस्थमा, बवासी, पथरी, गंजापन को करना है जड़ से खत्म तो फौरन घर ले आए ये पौधा

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भटकटैया या कंटकारी का फैलने वाला, बहुवर्षायु क्षुप होता है। इसके पत्ते लम्बे काँटो से युक्त हरे होते है ; पुष्प नीले रंग के होते है ; फल क्च्चे हरित वर्ण के और पकने पर पीले रंग के हो जाते है। बीज छोटे और चिकने होते है। यह पश्चिमोत्तर भारत मे शुष्कप्राय स्थानों पर होती है।
कटेरी का पौधा एक ऐसी जड़ी बूटी है जो कई बीमारियों के लिए रामबाण साबित होती है. इसे कंटकारी या भटकटैया के नाम से भी जाना जाता है. इस जंगली पौधे का इस्तेमाल औषधीय गुणों की वजह से इसका उपयोग अस्थमा, अपच, बवासीर, कान की सूजन और पेशाब की जलन जैसी बीमारियों में किया जाता है.
इसी के साथ इसका उपयोग बुखार, गर्भधारण, गर्भपात, पथरी, सिरदर्द, मस्तक पीड़ा, नेत्र रोग, नेत्रजाला, दंतपीड़ा, गंजापन, खांसी, दमा, जुकाम, पेट दर्द, पेशाब की रुकावट, पेशाब की जलन, दाद आदि में किया जाता है. दरअसल इसकी तासीर गर्म होती है, तेज होने के कारण यह कफ, वात आदि को खत्म करने वाली होती है. पित्त विकार को दूर करती है, पाचक, होती है,इसी के साथ ये खून को साफ करता है. चलिए बताते हैं इसके अन्य स्वास्थ्य फायदें क्या क्या हैं.
के झड़ने की समस्या में ये काफी कारगर है. इससे राहत पाने के लिए आपको कटेरी के 20-30 एमएल रस में थोड़ा सा शहद मिलाकर सिर में लगाकर मालिश करना चाहिए. ऐसा करने से आपके सर पर नए बाल आ जाएंगे.
पथरी की समस्या आज कल लोगों में आम हो गई है. इससे निपटने ते लिए आपको भटकटैया के 14-28 मिलीग्राम पंचांग का रस सुबह-शाम शहद के साथ सेवन करना चाहिए. लेकिन ध्यान रखें कि इसका सेवन करने से पहले एक बार डॉक्टर की सलाह ले लें.
यदि आप खांसी और ब्रोंकाइटिस से परेशान हैं तो 20 मिलीग्राम से 50 मिलीग्राम फूल शहद के साथ दिन में दो बार देने से बच्चों की खांसी कुछ दिन में ठीक हो सकती है. इसके अलावा वायु प्रणाली शोथ यानी ब्रोंकाइटिस से राहत पाने के लिए इसकी जड़ काढ़ा 20 से 40 मिलीलीटर की मात्रा में सुबह शाम लेना चाहिए. इससे बहुत आराम मिलता है. लेकिन इसका सेवन करने से पहले एक्सपर्ट की सलाह जरूर ले लें.
सिर दर्द होने पर इस पौधे का रस अपने माथे पर लगाने से आपको सर दर्द में तुरंत आराम मिल जाएगा. इसी के साथ यदि आपको आंखों में दर्द,का लाल हैं तो इसके लिए भी ये काफी कारगर है. इस समस्या से निपटने के लिए इसके 30 पत्ते पीसकर पेस्ट बना लें. और आंखों के ऊपर रख लें. लेकिन ध्यान रखें कि इससे आंखों में रस नहीं जाना चाहिए.
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