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चाणक्य नीति: व्यापार को सफलता की ऊंचाई पर पहुंचाती है ये बाते, ये है सफलता का राज

आचार्य चाणक्य एक महान राजनीतिज्ञ और कूटनीतिज्ञ थे | चाणक्य ने अपने ज्ञान को एक किताब का रूप दिया था और उस किताब का नाम था, चाणक्य नीति | चाणक्य नीति में आचार्य चाणक्य ने ऐसी बाते लिखी है, जिनका यदि मनुष्य पालन करे, तो उसे सफल और सुखी जीवन जीने से कोई रोक नहीं सकता |



आचार्य ने कुशलता, धैर्य और गंभीरता को नेतृत्व का सबसे बड़ा गुण बताया है | इसके अलावा उन्होंने कुछ ऐसी बाते भी बताई है, जिन पर चलकर व्यक्ति अपने कार्यक्षेत्र और व्यापार में बड़ी सफलता प्राप्त कर सकता है |

परिश्रम

चाणक्य ने कहा है कि परिश्रम ही सफलता की कुंजी है | जीवन में सफल होने के लिए कठोर परिश्रम करना सबसे जरुरी है | जो इंसान मेहनत से कभी नहीं घबराता है, वो अपने जीवन में सफलता की ऊंचाइयों को पाता है | लेकिन जो जीवन मेहनत से कतराते है, आलस से घिरे रहते है | ऐसे लोग कभी सफल नहीं हो सकते, ऐसे लोगो का भविष्य गर्त में चला जाता है |

योजना से कार्य करना

चाणक्य ने कहा है कि परिश्रम के बाद सबसे जरुरी योजना बनाना है | व्यापार में किसी भी कार्य को योजना बनाकर ही करना चाहिए | क्योंकि बिना योजना के आरम्भ किये गए कार्य में परेशानियां आती रहती है | इसकी वजह से कार्य सही समय पर पूरा नहीं हो पाता है |

साथ लेकर चलना

किसी भी कार्य को सफल बनाने के लिए | साथ काम करने वाले लोगो को साथ लेकर चलना होता है, क्योंकि बिना उनके सहयोग के आप सफल नहीं हो सकते | एक कुशल नेतृत्वकर्ता वह होता है, जो सबको साथ लेकर चलता है | वह नहीं जो सिर्फ आदेश देता है | एक कुशल नेतृत्वकर्ता सहयोगियों का मनोबल बढ़ाता है और उनकी क्षमता और ज्ञान का सही प्रयोग करता है |

अनुशासन

जीवन में सफलता और ऊँचे मुकाम के लिए अनुशासन सबसे जरुरी है | किसी भी कार्य को कठोर अनुशासन का पालन करके ही पूरा किया जा सकता है | चाणक्य कहते है कि बिना अनुशासन के किसी भी कार्य में सफलता नहीं पायी जा सकती है | इसीलिए जीवन में अनुशासन का पालन करने की गाँठ बाँध ले |
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