Space for advertisement

15 दिन में बने लखपति, 40 दिन में 14 टन खीरा उपजा कर बेच लिया

loading...
15 दिन में बने लखपति, 40 दिन में 14 टन खीरा उपजा कर बेच लिया - श्रेय हूमड़ 29 साल के युवा हैं। दिखने में सामान्य हैं लेकिन काम करने के अंदाज से लगता है कि रफ्तार के शौकीन हैं। इनके कारनामे आप सुनेंगे तो आप भी भौंचक्के रह जाएंगे। इंदौर से प्रबंधन की पढ़ाई करने के बाद व्यवसायी बनने की ख्वाहिश थी। लेकिन श्रेय ‘फटाफट किसान’ बन गए। वह भी सिर्फ 15 दिनों में। ये कहानी भी बड़ी रोचक है।

पिता के व्यवसाय में हाथ बंटाते – बंटाते उन्हें लगा कि हर सेक्टर में मंदी है लेकिन कृषि में नहीं। फिर क्या था। उन्होंने खेती किसानी करने की ठानी। पहुंच गए तमिलनाडु। यहां टैरेस गार्डन और पॉली हाउस में फसलों का उत्पादन लेना सीखा। 15 दिन बाद खंडवा लौटे और सिहाड़ा रोड पर आधे एकड़ में पॉली हाउस और आधे में नेट हाउस खोल दिया। उन्होंने पहली बार में ही 40 दिन में 14 टन खीरा का उत्पादन लिया।


श्रेय बताते हैं कि 2010-11 में इंदौर से एमबीए करने के बाद खंडवा में पिता का बिजनेस संभाला। इस दौरान देखा कि ऑटोमोबाइल से लेकर अन्य सेक्टरों में मंदी का दौर आया है। लेकिन कृषि में आज तक कभी ऐसा नहीं आया। बकौल श्रेय मैंने हिसाब लगाया कि आने वाले समय में फूड में अच्छा स्कोप है। मैं तमिलनाडु के मदुराई व अन्य शहरों में गया। यहां टैरेस गार्डन और पॉली हाउस देखे। आइडिया अच्छा लगा। खंडवा लौटकर इसके बारे में तीन महीने तक रिसर्च किया। लीज पर एक एकड़ जमीन ली। शासन की योजना का लाभ लिया। आधे एकड़ में पॉली हाउस और आधे में नेट हाउस खोल दिया। उन्होंने कहा परंपरागत खेती के मुकाबले पॉली हाउस और नेट हाउस में उत्पादन भी ज्यादा और उन्नत क्वालिटी का होता है।

पॉली हाउस से श्रेय ने 40 दिन में 14 टन खीरे का उत्पादन लिया। उन्होंने कहा मार्केट में दूसरों का खीरा 10 से 12 रुपए किलो थोक में बिकता है, वहीं हमारा खीरा 18 से 20 रुपए तक बिक जाता है। इसी तरह श्रेय ने टमाटर, मैथी, लौकी व धनिया सहित अन्य सब्जियां भी ली हैं। इनके दाम भी अच्छे मिले। श्रेय ने कहा मेरे परिवार में कोई भी किसान नहीं है। मैंने भी कभी नहीं सोचा था कि मैं किसान बनूंगा। लेकिन इस क्षेत्र में अच्छा स्कोप है।

दरअसल पॉली हाउस और नेट हाउस खेती की उन्नत तकनीक हैं। पॉली हाउस में जो भी सब्जियां लगाई जाती हैं, उसे किसान जितना भी खाद, पानी और ऑक्सीजन देगा, उतना ही फसलों को मिलेगा। इसमें बारिश का पानी भी अंदर नहीं जा सकता। नेट हाउस में भी प्रकाश और बारिश का पानी आधा अंदर आता है और आधा बाहर जाता है। यह गर्मी और ठंड में फसलों के लिए अच्छा होता है, जबकि पॉली हाउस सभी सीजन में फसलों के लिए फायदेमंद होता है।

एक तरफ सूखे प्रभावित इलाकों में किसानों की हालत खस्ता है। वहीं दूसरी तरफ श्रेय जैसे कुछ किसान अपने प्रयासों से पूरी किसान बिरादरी को कुछ नया करने की प्रेरणा दे रहे हैं। श्रेय भी मानते हैं कि किसान इन संकटों से बच सकते हैं बशर्ते वो एक व्यवसाय़ी की तरह सोचना शुरू करें। उसे एक बार में एक के बजाय तीन-चार फसलें लेना होगी। श्रेय कहते हैं वर्तमान में किसान जिस भी खाद्य वस्तु के दाम बढ़ते हैं, उसे बड़ी मात्रा में बो देते हैं। ऐसे में निश्चित तौर पर उत्पादन ज्यादा होता है और मांग कम हो जाती है। दाम कम मिलते हैं फिर वह रोता है।
loading...

Post a Comment

0 Comments

Adblock Detected

Like this blog? Keep us running by whitelisting this blog in your ad blocker

Thank you

×
Get the latest article updates from this site via email for free!