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केजरीवाल का सफल प्रयोग,20 रुपये के कैप्सूल से खाद में बदल गई 90% पराली

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पराली जलाने से फैलने वाले प्रदूषण से निपटने के लिए भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (पूसा इंस्टीट्यूट) द्वारा तैयार बायो डिकम्पोजर का छिड़काव सफल होता नजर आ रहा है. 13 अक्टूबर को केजरीवाल सरकार ने पूसा इंस्टीट्यूट के वैज्ञानिकों के साथ दिल्ली में नरेला के हिरणकी गांव में 1 हेक्टेयर (ढाई एकड़) धान के खेत में 500 लीटर बायो डिकम्पोजर का पहला छिड़काव कराया था.


छिड़काव के ठीक 15 दिन बाद ‘आजतक’ की टीम ने पूसा इंस्टीट्यूट के वैज्ञानिकों के साथ खेत का जायजा लिया. वैज्ञानिकों का कहना है कि अब तक 15 दिन में 90% पराली गलकर खाद में बदल चुकी है. दिल्ली में करीब 2000 एकड़ खेत में धान की खेती होती है, जिस वजह से काफी बड़ी मात्रा में पराली जमा होती थी. केजरीवाल सरकार द्वारा 2000 एकड़ खेत में मुफ्त खर्च पर बायो डिकम्पोजर का छिड़काव कराया था.

बायो डिकम्पोजर के छिड़काव के लिए एक रुपए भी खर्च नहीं हुए, सारा खर्चा सरकार ने उठाया है. हमें 15 दिन में दवाई का छिड़काव सफल नजर आ रहा है और हम काफी संतुष्ट हैं.

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