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इस अंग पर विक्स लगाने से होता ऐसा चमत्कार, देखकर रह जाएंगे हैरान

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खांसी या सर्दी होने पर लोग विक्स का इस्तेमाल करते हैं, इन बीमारियों में लोग आमतौर पर विक्स को छाती और सिर पर लगाते है ताकि शरीर को जल्दी से जल्दी आराम मिल सके और इसके साथ ही रात में नींद भी अच्‍छी आती है। मगर शायद आपको इस बात की कोई जानकारी नहीं होगी की आप विक्स का इस्तेमाल शरीर के दूसरे हिस्सों पर करके और भी तरह की और भी कई तरह के फायदा लिया जा सकता है। अगर हम विशेषज्ञों की माने तो बताया जाता है की यदि आप विक्‍स को सीने में रगड़ने की जगह अगर आप विक्स को अपने पैर के तलवों में अच्छी तरह से मालिश करते है तो इससे आपकी खांसी-जुकाम बहुत ही जल्दी ठीक हो जाती है।

बताना चाहेंगे की अगर आप सर्दी खांसी आदि समस्याओं से परेशान है तो आपको रात को सोने से पहले इसे अपने पैर के तलवे पर लगा लेने से सुबह उठते उठते काफी आराम मिल जाता है और पहले की अपेक्षा काफी बेहतर महसूस करते है। आपकी जानकारी के लिए आपको बता दे की ऐसा कहीं भी नहीं बताया गया है की विक्‍स आपको सर्दी या जुकाम से छुटकारा दिलाता है मगर फिर भी सैकड़ों लोगों का मानना है की इसके इस्तेमाल से उन्हे इस तरह की समस्या से हमेशा राहत मिली है। इन लोगों का मानना है की जब भी कभी विक्स से पैर के तलवों में मालिश की जाती है तो इसके बाद आपको कुछ ही समय में ऐसा महसूस होने लगता है की आपको खांसी, अस्‍थमा, सर्दी, जुकाम आदि में आराम मिल रहा है। हालांकि जब भी आप कभी विक्स का इस तरह से इस्तेमाल करते है तो उसके बाद आपको यह जरूरी है की मालिश के बाद अपने पैरों को अच्छे से ढँक ले या फिर आप चाहें तो मोजे भी पहन सकते है तभी सारी रात विक्स अपना असर दिखा पाता है।


बता दें की कुछ वैज्ञानिक इस प्रकार के इलाज को सही तरीका नहीं मानते, मगर आम लोगों की माने तो यह प्रक्रिया आमतौर पर बच्‍चों के लिए काफी ज्यादा फायदेमंद माना गया है। वहीं दूसरी तरफ अगर हम मनोवैज्ञानिकों की माने तो उनके अनुसार यह घरेलू नुस्‍खा कुछ समस्‍याओं से निजात जरूर दिलाता है, साथ ही साथ तनाव को भी कम करता है। बता दें की खांसी और अस्‍थमा जैसी समस्‍या किसी को भी हो सकती है और जब भी आप ऐसी किसी समस्या से ग्रस्त होते है टी यह सामान्य है की आपको तनाव होगा ही होगा। ऐसे में आप विक्स की इस प्रक्रिया को अपनाते है तो इस समस्या से निजात पाया जा सकता है।

वैसे देखा जाए तो इस नुस्‍खा का इस्तेमाल अगर शुरुआती लक्षणों के दौरान ही किया जाए तो ज्यादा बेहतर होगा क्योंकि यह तरीका कभी भी इलाज का सम्पूर्ण तरीका नहीं बन सकता है। और सबसे महत्वपूर्ण बात तो ये है की अगर आप इस तरीके का इस्तेमाल बच्चे पर कर रहे है तो यह भौत ही आवश्यक है की आप सामान्य से ज्यादा सावधानी बरतें ताकि किसी भी तरह की कोई अनायास समस्या न होने पाये जिससे आपकी और बच्चे की तकलीफ बढ़ जाए।
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