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घर से भागकर मुंबई आई थी दो किशोरी लड़कियां, फिर ऑटो वाले ने जो किया वो चौकाने वाला था

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ऑटो रिक्शा ड्राइवर्स की इमेज आम जनता के बीच कोई ख़ास नहीं हैं. उन्हें अक्सर ज्यादा पैसे चार्ज करने, मीटर के साथ छेड़छाड़ करने या कहीं जाने से मना करने के लिए जाना जाता हैं. कई लोगो को उनकी भाषा और गाली गलोच वाला तरीका भी रास नहीं आता हैं. हालाँकि आप ये नहीं कह सकते कि सभी ऑटो वाले खराब होते हैं. इनमे से कुछ काफी इमानदार और नेकदिल भी होते हैं. ऐसा ही एक ऑटो चालाक मुंबई में हैं जिसने कुछ ऐसा काम किया हैं जिसे जान आप उसे सलाम करने को मजबूर हो जाओगे.

रिपोर्ट के अनुसार सोनू यादव नाम का 28 वर्षीय ऑटो चालाक मुंबई के कुरला लोकमान्य तिलक टर्मिनस (LTT) में काम करता हैं. 12 फरवरी को उसके ऑटो में दो किशोरी लड़कियां सवार हुई थी. उनसे बातचीत के दौरान सोनू को ये पता लगा कि दोनों बेंगलुरु की रहने वाली हैं और घर से भागकर मुंबई आई हैं. बैंगलोर मिरर से बातचीत के दौरान सोनू ने बताया कि ‘मैं उन दोनों को एक प्रोडक्शन हाउस ले गया था. उनका कहना था कि प्रोडक्शन वालों ने उन्हें इंटरव्यू के लिए बुलाया हैं. लेकिन सिक्योरिटी गार्ड ने उन्हें कहा कि आप अपना रिज्यूम सबमिट कर दो, यहाँ कोई भी वाक इन इंटरव्यू नहीं होगा.’

सोनू ऑटो वाले ने दोनों लड़कियों को सलाह दी कि वे उस व्यक्ति से फोन पर बात कर ले जिन्होंने उन्हें प्रोडक्शन हाउस में इंटरव्यू के लिए बुलाया था. हालाँकि दोनों के पास मोबाइल फोन नहीं था. उन्होंने सोनू के मोबाइल से ही कुछ कॉल्स किए लेकिन सामने से कोई जवाब नहीं आया. ऐसे में सोनू को शक हुआ कि कुछ तो गड़बड़ हैं. फिर सोनू ने उनसे सख्ती से पूछा कि वे सच सच बताए वरना वो पुलिस को सूचित कर देगा.

इसके बाद दोनों लड़कियों ने सोनू को बताया कि वे 15 साल की हैं और कनाकानगर में लिटिल एंजल्स स्कूल की 9वीं क्लास में पढ़ती हैं. 11 फरवरी को ये दोनों स्कूल से घर जाने की बजाए 840 रुपए जोड़, बुरका पहन लोकमान्य तिलक एक्सप्रेस ट्रेन से मुंबई आ गई थी. वे घर से इसलिए भागी थी क्योंकि उन्हें एक्टिंग में करियर बनाना था.

सोनू ने बताया कि ‘मैंने उन दोनों लड़कियों से ऑटो के पैस नही लिए क्योंकि मुझे उनके लिए बुरा लग रहा था. उनकी सेफ्टी को ध्यान में रखते हुए मैंने उन्हें सीसीटीवी निगरानी वाले प्रीपेड ऑटो स्टैंड ऑफिस में बैठा दिया था. इसके बाद मेरे एक नेकदिल दोस्त गुलाब गुप्ता और मैंने 700 रुपए जोड़े और उन लड़कियों के खाने और घर (बेंगलुरु) की टिकट्स की व्यवस्था की. दोनों लड़कियां 14 फरवरी को अपने घर सही सलामत पहुँच गई.’
सोनू ने दोनों लड़कियों को अपना मोबाइल नंबर भी दिया था ताकि मुंबई से बेंगुलुर के सफ़र में रास्ते में कोई इमरजेंसी हो तो वे उसे कॉल कर ले. सोनू ने बाद में दोनों लड़कियों के माता पिता से भी बातचीत की. सोनू का कहना हैं कि उसे बहुत ख़ुशी हैं कि दोनों लड़कियां सुरक्षित अपने घर पहुँच गई.

ऑटो वाले ने इन दोनों लड़कियों के लिए जो भी किया वो सच में काबिलेतारिफ था. आजकल का ज़माना कैसा हैं आप अच्छे से जानते ही हैं. यदि कोई बुरा आदमी उस ऑटो वाले की जगह होता तो वो इस स्थित का फायदा भी उठा सकता था.
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