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Patiala Pag: जानिए पटियाला पैग के नामकरण की दिलचस्प कहानी



शराब का सेवन स्वास्थ्य के लिए हानिकारक होता है लेकिन पटियाला पैग (Patiala Pag) तो निश्चित ही बहुत ही अधिक नुकसानदायक. लेकिन बात जब पटियाला पैग की हो रही है तो ये इसके नामकरण से जुड़ी अनोखी और दिलचस्प जानकारी तो आपको जरूर होनी ही चाहिए, भले ही आप शराब ना पीते हों.

आजकल लोग खुशी हो या गम, शराब को पीने का बहाना तो निकाल ही लेते हैं. और जब पीने पिलाने का दौर शुरू होता है तो पटियाला पैग से वास्ता पड़ ही जाता है. लेकिन क्या आप जानते हैं की पेग पटियाला ही क्यों होता है दिल्ली, पटना या चंडीगढ़ अथवा कोई दूसरा नाम क्यों नहीं? बॉलीवुड हो या पंजाबी फिल्म इंडस्ट्री, पटियाला पेग (Patiala Pag) के नाम पर कई गाने भी इस के नाम से फे़मस हैं. ऐसे में जानना दिलचस्प हो जाता है कि यह किसके दिमाग की उपज है और इसे ‘पटियाला पेग’ ही क्यों कहा जाता है तो आइये जानते हैं पटियाला पेग के नामकरण का वो दिलचस्प किस्सा…
क्रिकेट के शौकीन राजा भूपिंदर सिंह

Patiala Pag के बारे में जानने से पहले हमें राजा भूपिंदर सिंह के बारे में जानना जरूरी है. इतिहास के अनुसार बताया जाता है कि महाराजा भूपिंदर सिंह, जो कि 1891 से लेकर 1938 तक पटियाला के राजा थे. आपने शायद उनका नाम सुना भी होगा, ये वही महाराजा भूपिंदर सिंह थे जिन्होंने अपनी रॉल्स रॉयस से शहर का कचरा उठवाया था. इस किस्से से शायद आप उन्हें जान ही गए होंगे.


पटियाला पेग (Patiala Pag) के नामकरण की अनोखी कहानी

विकिपीडिया के अनुसार, बात साल 1920 की है जब डगलस एकादश के विरुद्ध अंबाला छावनी में महाराजा भूपेंद्र सिंह ने एक लंबी पारी खेली. महाराज भूपिंदर सिंह ने 14 चौकों और 16 छक्कों के साथ 242 रन बनाए. जिस मैदान पर मैच खेला गया वहीं दोनों ही टीमों के लिए रात्री भोज की व्यवस्था रखी गई. उत्साहवर्धक लंबी पारी खेलने के कारण महाराजा बेहद खुश थे. इसी खुशी की वजह से उन्होंने खुद गिलास में व्हिस्की डालकर पार्टी की शुरुआत की.

गिलास में आमतौर पर जितनी शराब डाली जाती है, उस दिन महाराजा ने उससे दुगनी शराब की मात्रा गिलास में डाली. ‘पटियाला पेग’ का जन्म इसी पार्टी से हुआ. कथित तौर पर एक बार महाराजा ने अपनी सबसे बड़ी अंगुली से नापकर पेग बनाए. यह पेग आम पेग से बहुत बड़ा था. लिहाज़ा इसे ‘पाटियाला पेग’ की कहा जाने लगा. वैसे तो पटियाला पैग को नापने की कोई निश्चित इकाई नहीं है लेकिन शराब पीने वालों के अनुसार पटियाला पैग में करीब 120 ML शराब होती है. अर्थात पटियाला पैग में आधा गिलास पानी और आधा गिलास शराब होती है.



जब महाराजा भूपिंदर सिंह ने कर्नल डगलस को ग्लास थमाते हुए चीयर्स बोला तो कर्नल ने काफी उत्सुकतावश महाराज से पूछा कि पेग इतना बड़ा क्यों है, तो उन्हें जवाब दिया गया यह ‘पटियाला पेग’ है. इसके साथ ही उन्होने ये तर्क भी दिया की पटियाला या पंजाब के लोग तो इससे भी बड़े-बड़े गिलास में लस्सी और दुध एक ही सांस में गटक जाते है.
दुनिया भर में लोक्रप्रिय ‘पटियाला पैग’

भले ही उस दौर में ‘पटियाला पैग’ सिर्फ मेहमानों को परोसा जाता था. लेकिन आज के दौर में शादी हो या पार्टी, कोई ख़ास मौका हो, शराब पीने बैठे लोगों के बीच पटियाला पैग का ज़िक्र न हो, ये असंभव है. पंजाबी परिवारों, ख़ासकर सरदार और जाट समुदायों में इस पैग का इस्तेमाल बहुत होता है. भारत ने दुनिया को योग और चावल जैसी कई चीज़ें दी है. उसी तरह Patiala Pag आज दुनियाभर में फेमस है. चेतावनी: शराब का सेवन स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक है.


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