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मोदी सरकार ने माना सुदर्शन टीवी मुस्लिमों के खिलाफ ज़हर फैला रहा, पर बैन नहीं लगाया

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सुदर्शन टीवी का शो ‘बिंदास बोल’. इसे लेकर लंबे समय से विवाद चल रहा है. मामला सुप्रीम कोर्ट (SC) में है. अब इस मुद्दे पर केंद्र सरकार ने 18 नवंबर को SC में कहा कि शो के एपिसोड्स ‘अपमानजनक थे और इनमें सांप्रदायिक दृष्टिकोण को बढ़ावा देने की संभावना थी’. भले ही केंद्र ने शो के कॉन्टेंट को ‘अपमानजनक’ माना, लेकिन इस पर बैन लगाने की मंशा नहीं दिखाई. ‘इंडियन एक्सप्रेस’ की रिपोर्ट के मुताबिक, केंद्र का कहना है कि चैनल इस शो के बाकी एपिसोड्स प्रसारित कर सकता है, लेकिन उनमें बदलाव करके ।


केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट में जो एफिडेविट सौंपा, उसमें 4 नवंबर को सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय की तरफ से पास हुए एक ऑर्डर का रेफरेंस दिया. इस ऑर्डर में कहा गया है ।

“इस केस के सारे फैक्ट्स और परिस्थितियों की जांच करने के बाद और ब्रॉडकास्टर के मौलिक अधिकारों की बैलेंसिंग के बाद, ‘सुदर्शन टीवी चैनल लिमिटेड’ को भविष्य में सावधान रहने की चेतावनी देने का फैसला किया गया है. यह निर्देश दिया गया है कि अगर भविष्य में प्रोग्राम कोड का कोई उल्लंघन पाया जाता है, तो कठोर दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी.”

दरअसल, ‘बिंदास बोल’ शो के प्रोमो में सुरेश चव्हाणके ने ‘UPSC जिहाद’ और ‘नौकरशाही जिहाद’ का पर्दाफाश करने का दावा किया था. चार एपिसोड्स टेलिकास्ट होने के बाद मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा. 15 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस डी.वाई. चंद्रचूर्ण, जस्टिस इंदू मल्होत्रा और जस्टिस केएम जोसेफ की बेंच ने सुनवाई करते हुए शो के बाकी एपिसोड्स के प्रसारण पर रोक लगा दी थी. बेंच ने कहा था कि “शुरुआत में यही नज़र आ रहा है कि कार्यक्रम का उद्देश्य मुस्लिम समुदाय को बदनाम करना है.” 26 अक्टूबर को सॉलिसिटर जनरल ऑफ इंडिया तुषार मेहता ने कहा था कि वो मंत्रालय द्वारा शुरू की गई कार्यवाई को रिकॉर्ड में रखेंगे. फिर अब 18 नवंबर को मंत्रालय के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में रखा गया. वो आदेश जो चार नवंबर को जारी किया गया था ।

और क्या कहा है मंत्रालय ने अपने आदेश में?
4 नवंबर के आदेश में कहा गया है कि “राय ये है कि भले ही बोलने और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता एक मौलिक अधिकार है, लेकिन टेलिकास्ट हुए एपिसोड्स की टोन और तत्व यही संकेत देते हैं कि चैनल ने विभिन्न कथनों और ऑडियो-विज़ुअल कॉन्टेंट के ज़रिए प्रोग्राम कोड का उल्लंघन किया है.”

आदेश में आगे कहा गया है कि मंत्रालय ने चैनल के इस तर्क पर ध्यान दिया है कि प्रोग्राम की सेंट्रल थीम एक विशेष समुदाय नहीं, बल्कि भारत के जकात फाउंडेशन की गतिविधियां हैं. हालांकि मंत्रालय ने आगे कहा,

“चैनल ने जिस तरह से इन सबका प्रदर्शन किया, जिनमें सेलेक्शन प्रोसेस पर कमेंट्स, सिविल सर्विसेज़ एग्जामिनेशन सिस्टम सब शामिल है, इससे एक विशेष समुदाय और UPSC को खराब नज़रिए से दिखाया गया. चैनल बहुत अच्छी तरह से इस कटुता और ऐसे वीडियो को इग्नोर कर सकता था, जो शिष्ट नहीं थे.”

मंत्रालय ने चैनल से कहा कि वो ‘बिंदास बोल’ के आगे के एपिसोड्स के कॉन्टेंट का रिव्यू करें. उन्हें एपिसोड्स के कॉन्टेंट में बदलाव करने के निर्देश भी दिए गए हैं. खासतौर पर ऐसे कॉन्टेंट का, जो शिष्ट नहीं हैं, जो धर्म या समुदाय पर हमला करते हों, या सांप्रदायिक नज़रिए को बढ़ावा देते हों, या अपमानजनक हों, गलत हों, या आधे-गलत हों, या ऐसे हों जिनसे हिंसा को बढ़ावा मिले, या लॉ एंड ऑर्डर के खिलाफ हों, या एंटी-नेशनल नज़रिए को प्रमोट करते हों, किसी निश्चित ग्रुप या किसी व्यक्ति की आलोचना हो, उसे बदनाम करते हों, या ऐसे विज़ुअल्स या शब्दों का इस्तेमाल हुआ हो, जो किसी जातीय, भाषाई और क्षेत्रीय समूहों पर निंदक, विडंबनापूर्ण और अपमानजनक रवैया रखते हों ।

ये विवाद शुरू हुआ था अगस्त से. जब सुदर्शन टीवी ने अपने शो ‘बिंदाल बोल’ का प्रोमो टेलिकास्ट किया था. प्रोमो में चैनल के एडिटर-इन-चीफ सुरेश चव्हाणके इस बात पर सवाल खड़ा करते दिख रहे थे कि IAS-IPS एग्ज़ाम को क्लियर करने वालों में अचानक से मुस्लिम समुदाय के लोगों की संख्या कैसे बढ़ गई. ये आरोप लगाया कि जकात फाउंडेशन, जो मुस्लिम स्टूडेंट्स को UPSC एग्ज़ाम क्लियर करने में मदद कर रहा है, उसे एंटी-इंडिया ऑर्गेनाइज़ेश

(दा लल्लनटॉप से साभार)
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