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अनाथ-बूढ़े’ नहीं, इस आश्रम में आते हैं पत्नियों द्वारा सताए गए पति

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अनाथ-बूढ़े’ नहीं, इस आश्रम में आते हैं पत्नियों द्वारा सताए गए पति - दुनिया में विभिन्न प्रकार के आश्रम है. जहां अपनों के ठुकराए लोगों को सहारा मिलता है. इसमें मुख्य तौर पर अनाथ आश्रम, वृद्ध आश्रम और विधवा आश्रम शामिल हैं. जिन बच्चों के माता-पिता नहीं होते या पैदा होते ही उन्हें किसी कारण के चलते छोड़ जाते हैं, ऐसे बच्चों को अनाथ आश्रम में रखा जाता है. तो इसी तरह जिन बूढ़े माता-पिता को उनके बच्चे घर से निकल देते हैं. उन्हें वृद्ध आश्रम में पनाह मिलती है. हालांकि दुनिया में कईं जगह ऐसी भी हैं, जहां लोग जीवन भर की कमाई सरकार को देकर ऐसे आश्रमों में जाके रहते हैं लेकिन अगर हम आपको कहें कि भारत में एक ऐसा आश्रम भी है, जहां पत्नियों के अत्याचार के सताए मर्द रहते हैं, तो क्या आप विशवास करेंगे? जी हां, ये बिलकुल सच है कि एक ऐसा आश्रम भी है. जहां अपनी पत्नियों द्वारा सताये और समाज द्वारा ठुकराये गये मर्द आकर रहते हैं. लेकिन इस आश्रम में प्रवेश लेने के लिए कुछ शर्तों को पूरा करना पड़ता है. जो अबला मर्द इन चुनौतियों और जो इन शर्तों को क्वालीफाई करले तो उसे इस आश्रम में प्रवेश मिल जाता है.

बता दें कि पत्नी पीड़ित पुरुष आश्रम किसी किताब में बने आश्रम की तरफ इशारा नहीं करता. बल्कि सच में ऐसा एक आश्रम, भारत में मौजूद है. जो कि महाराष्ट्र के औरंगाबाद ज़िले में स्थित है. इस आश्रम के सिर्फ 12 किलोमीटर की दूरी पर शिरडी हाईवे शुरू होता है. इस आश्रम को ख़ास तौर पर ऐसे मर्दों के लिए खोला गया है. जो अपनी पत्नियों के सताए हुए हैं.

आपको बतादें, कि इस आश्रम की स्थापना भारत फुलारे ने की थी. भारत फुलारे भी अपनी पत्नी के सताये हुए थे. उनकी पत्नी ने उन पर 4 केस दर्ज़ करा रखे थे. इसी वजह से परेशान हो कर उन्होंने इस आश्रम की स्थापना की. भारत अपनी पत्नी के इस रवैये से इतना परेशान था, कि उसने कईं बार आत्महत्या करने की भी कोशिश की थी. क्योंकि उसके सारे रिश्तेदार उससे बात करने से कतराते थे और उससे दूर रहते थे. भारत केस दर्ज़ से इतना परेशान था, कि कईं हफ्तों तक वो अपने घर भी नहीं गया था.

इसी दौरान उसकी मुलाक़ात उसी के जैसे कुछ और भी पत्नियों के सताए मर्दों से हुई. जिसके बाद उन सब ने आपस में एक दूसरे के साथ खुद का दुखड़ा रोया और इस आश्रम को खोलने का फैसला लिया.

इसके बाद उन्होंने कानूनी मदद से अपनी पत्नियों के अत्याचार से दूर हो गए. खुद आज़ाद होने के बाद उन सब ने फैसला लिया की वो और भी पत्नियों के सताये मर्दों की मदद करेंगे. इसके बाद 16 नवंबर 2016 को पुरुष अधिकार दिवस के दिन उन सब ने इस आश्रम की नीव रखी.

लेकिन इस आश्रम में प्रवेश करने के लिए कुछ नियम कायदे भी हैं. तो आइये अब आपको उन शर्तों के बारे में बताते हैं.
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1 उस व्यक्ति पर कम से कम उसकी बीवी ने 40 केस दर्ज किये हों.

2 यां फिर वो व्यक्ति बीवी के केस दर्ज़ पर भत्ता न देने पर जेल जा चूका हो.

3 केस दर्ज़ की वजह से अगर उसकी नौकरी भी चली गयी हो तो उसे भी इस आश्रम में भर्ती मिल सकती है.

इस आश्रम में रहने वाला हर व्यक्ति अपनी क्षमता के हिसाब से कमाता है, और इस आश्रम के ट्रस्ट में जमा करता है. इस आश्रम का खर्चा ऐसे ही निकलता है.
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