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इस मंदिर होती है ऐसी कृपा की बलि देने के बाद भी नहीं मरता बकरा

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हमारे देश में कई ऐसे धार्मिक स्थल हैं जहां भगवान को खुश करने के लिए लोग जानवरों की बलि देते हैं। चाहे वह हिंदू धर्म के लोग हों या फिर मुस्लिम धर्म के। काफी धर्मों के धार्मिक स्थलों पर जानवरों की बलि दी जाती है। आज हम आपको ऐसे मंदिर के बारे में बता रहे हैं जहां जानवरों की बलि तो दी जाती है लेकिन वो मरता नहीं। ये मंदिर है बिहार के कैमूर जिले का जहां मुंडेश्वरी माता मंदिर है। इस मंदिर में बकरे की बलि दी जाती है लेकिन वो मरता नहीं हैं।

बिहार का मुंडेश्वरी माता के इस मंदिर में माता को प्रसन्न करने के लिए बकरे की बलि देते हैं लेकिन उसे मारते नहीं बल्कि यहां के लोगों का मानना है कि ये पूजा वो पिछले 1900 सालों से ऐसा कर रहे हैं। ऐसी मान्यता है कि माता के इस मंदिर में बलि देने से सभी मनोकामना पूरी हो जाती है। यहां मां को खुश करने के लिए ऐसा होता है। लेकिन माता बकरे का रक्त नहीं मांगती। लोगों का मानना है कि लोग बताते हैं कि जब बकरे को बलि के लिए माता की मूर्ति के सामने लाया जाता है तो पुजारी ‘अक्षत’ पूजा करके चावल को मां की मूर्ति को स्पर्श कराकर बकरे पर फेंकते हैं और बकरा उसी समय बेहोश हो जाता है। फिर यही अक्षत पूजा दोबारा होती है। जिसके बाद बकरा खड़ा हो जाता है।


बता दें कि माता मुंडेश्वरी का ये मंदिर बिहार के मुख्य धार्मिक स्थलों में से एक है। ये मंदिर एक पहाड़ी पर है जिसकी ऊंचाई लगभग 608 फीट के आसपास है। ऐसा कहते हैं कि इस मंदिर का निर्माण उदय सेन नामक क्षत्रप शासन काल में हुआ था।

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