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इस ट्रक ड्राइवर के नाम से ही कांपती है PAK सेना, सरकारों से आजतक नहीं मिला कोई भी सम्मान

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हमारे देश के फौजी हमारे लिए असली हीरो हैं, लेकिन कुछ ऐसे हीरो भी हैं जिन्हे लोगों ने भुला दिया और वो फौजी ना होते हुए भी फौजी की तरह देश के लिए लड़ें हैं।ऐसे ही एक वीर की गाथा आज हम आपको बताने जा रहे हैं, जो देश के लिए सब कुछ कुर्बान करने को तैयार हो गया था, बिना किसी स्वार्थ के तो इतने सालों तक उसे पुरानी सरकारों ने उसे कोई सम्मान ही नहीं दिया।

हम बात कर रहे हैं, एक ट्रक ड्राइवर कमल नयन की जो पाकिस्तान के साथ 1965 की लड़ाई के समय पंजाब से एक ट्रक में गेंहूं भरकर ला रहे थे।तभी उन्हें पता चला पाकिस्तान के साथ युद्ध शुरू हो गया है।फौजियों ने उनसे कहा की आप अपने ट्रक के साथ सेना का साथ दे सकते हैं।इतना सुनते ही इस देश भक्त ने ट्रक के अंदर से गेहूं की 90 बोरियां सड़क पर ही उतार दी और सेना का गोला बारूद और हथियार लोड करवा लिए।

बहादुर फौजी उसके ट्रक में सवार हो गए और वो एक वीर योद्धा की तरह ट्रक को दौड़ाते हुए आगे बढते रहे। 80 पाकिस्तानी सैनिकों को तो उन्होंने ट्रक से ही रोंद डाला और बिना डर के ऐसे ट्रक चलाते रहे की जैसे कोई आम रोड़ हो।

उस समय कमल नयन जी का ट्रक और भारतीय सेना पाकिस्तान के सियालकोट तक पहुंच गयी थी और सरकार ने उनकी बहादुरी से प्रभावित होकर उन्हें अशोक चक्र भी दिया गया, लेकिन अन्य सुविधाओं और अपने अधिकारों के लिए भारत के इस वीर योद्धा को 50 सालों तक न्याय नहीं मिला।मोदी सरकार के आने से पहले की सरकारों ने इस फौजी की बहादुरी को भुला दिया था। मज़ेदार खबरों के लिए यहाँ क्लिक करें
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