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₹1 के नोट में ऐसा क्या है कि 100 सालों में कोई सरकार इसे बंद नहीं कर पाई



एक रुपए की नोट. हाथ में तो आती नहीं है, फोटो ही देख ल्यो.

एक रुपए का नोट याद है? क्यों नहीं याद होगा! बचपन में जब घर में कोई फंक्शन होता था, तो ताऊजी बैंक से गड्डियां लाते थे. देखकर मन लबरिया जाता था कि इनमें से चार-पांच नोट मिल जाएं, तो मजा आ जाए. वैसे घरवालों ने कभी दिए नहीं. जो भी नोट मिले, रिश्तेदारों से मिले. ये तो हुई हमारे बचपन की बात. इसी नोट के बारे में हमारे चाचा-मामा बताते हैं कि जब उन्हें बचपन में एक रुपए का नोट मिल जाता था, तो उनके स्कूल में पार्टी हो जाती थी.

खैर, यादों में चले गए, तो वहीं रह जाएंगे. अपन एक रुपए की नोट पर इसलिए बात कर रहे हैं, क्योंकि आज इसका बड्डे बै. आज ये पूरे 103 साल का हो गया है. पहली बार एक रुपए का नोट 30 नवंबर, 1917 को लॉन्च किया गया था. तब से लेकर अब तक इसने कई उतार-चढ़ाव देखे हैं. आइए, आपको इसके सफर के बारे में बताते हैं और साथ में कुछ इंटरेस्टिंग फैक्ट्स भी.



एक रुपए की पुरानी तस्वीर, जिस पर किंग जॉर्ज -6 की तस्वीर है

#1. एक रुपए का नोट भारत में सबसे पहले 30 नवंबर, 1917 को लॉन्च हुआ था, जो इंग्लैंड से छपकर आया था. तब नोट वहीं छपते थे, जहां सत्ता का केंद्र होता था. इस पर किंग जॉर्ज पंचम की फोटो थी. इसे हाथ से बनाए गए सफेद कागज पर छापा गया था, जिस पर तीन ब्रिटिश वित्त सचिव एमएमएस गूबे, एसी वाटर्स और ए. डेनिंग के सिग्नेचर थे. ये 25 नोटों के पैकेट बनाकर ईशू किए गए थे.



ये संभवत: पहली लाट में छपे नोटों की तस्वीर है. इस पर किंग जॉर्ज पंचम की तस्वीर है.

#2. इसका कोई लिखित रिकॉर्ड नहीं है, लेकिन माना जाता है कि एक रुपए का नोट वर्ल्ड वॉर-1 की वजह से छापा गया. पहला वर्ल्ड वॉर 1914 से 1918 तक चला. 1917 में जब ये चरम पर था, तब हथियार बनाने के लिए कोलोनियल अथॉरिटी को चांदी समेत कई धातुओं की ज़रूरत थी. उस समय भारत में एक रुपए के सिक्के में 10.7 ग्राम चांदी होती थी, तो सिक्के के बजाय नोट छापे जाने शुरू हो गए. नोट में सिक्के के मुकाबले कम लागत आ रही थी.



इस तस्वीर में नोट के पिछले हिस्से की भी डीटेल है

#3. 1917 में एक रुपए के सिक्के में 10.7 ग्राम चांदी होती थी. अभी चांदी की कीमत करीब 59 हजार रुपए प्रति किलो है यानी 10 ग्राम चांदी की कीमत 590 रुपए. मोटे तौर पर ये समझ लीजिए कि 100 साल पहले आप एक रुपए में जितना सामान खरीद सकते थे, आज उतने के लिए ही आपको 590 रुपए देने होते हैं.



अशोक की लाट के साथ भारत सरकार द्वारा छापी गई एक रुपए की नोट

#4. 1926 में पहली बार एक रुपए के नोट जारी होने बंद हुए थे. RBI के रिकॉर्ड्स के मुताबिक ऐसा लागत संबंधी कारणों की वजह से हुआ था. 1940 में एक रुपए का नोट फिर मार्केट में आया, जो 1994 तक चलता रहा. 1994 में भारत सरकार ने फिर इन्हें जारी करना बंद कर दिया और ये रोक 2014 तक चली. 1 जनवरी 2015 से फिर से एक रुपए के नोट की छपाई शुरू हुई.

#5. एक रुपए के नोटों की छपाई भले दो बार बंद हुई हो, लेकिन मार्केट में ये हमेशा लीगल रहे. लोग इनका इस्तेमाल अधिकतर खास मौकों पर करते हैं. 1994 तक एक रुपए के नोट इंडिगो कलर में छापे जाते थे, लेकिन 2015 में जब नोट दोबारा छपने शुरू हुए, तो इसमें गुलाबी और हरा रंग जोड़ा गया.



एक रुपए की पुरानी नोटों की एक तस्वीर

#6. इंडियन करंसी के सभी नोट RBI छापती है, लेकिन एक रुपए का नोट भारत सरकार छापती है. इस पर RBI गवर्नर के नहीं, बल्कि वित्त सचिव के सिग्नेचर होते हैं. बाकी नोटों पर ‘मैं धारक को इतने रुपए अदा करने का वचन देता हूं’ लाइन लिखी होती है, लेकिन एक रुपए की नोट पर नहीं लिखी होती है. इसीलिए इस नोट को लाइबिलिटी माना जाता है.

#7. एक रिपोर्ट के मुताबिक 1917 से 2017 के बीच एक रुपए के नोट 125 अलग-अलग तरीकों से छापे गए. ये बदलाव नंबर्स और सिग्नेचर्स से जुड़ा होता था. कुछ स्पेशल सीरीज़ नोट भी थे, जैसे 1969 में गांधीजी के 100वें जन्मदिन पर उनकी फोटो के साथ खास सीरीज़ छापी गई थी. 2017 तक इस नोट में 28 बार बदलाव किए जा चुके थे और इस पर 21 बार सिग्नेचर बदल चुके थे.



भारत सरकार द्वारा छपाई दोबारा शुरू करने के बाद एक रुपए की नोट

#8. आजादी के बाद 1949 में भारत सरकार ने एक रुपए की नोट से किंग जॉर्ज पंचम की फोटो हटाकर अशोक लाट की तस्वीर लगानी शुरू कर दी थी. हालांकि, सरकार पहले गांधीजी की फोटो लगाना चाहती थी, लेकिन बाद में ऐसा नहीं हो पाया.

#9. भारत सरकार को एक रुपए का नोट छापने का अधिकार Coinage Act के तहत है. इस एक्ट में समय-समय पर बदलाव होता रहता है. हालांकि, एक रुपए के नोट के डिस्ट्रीब्यूशन की जिम्मेदारी RBI की ही होती है. वैसे भी, नोटों से जुड़ा कोई भी अप्रूवल सरकार और RBI साथ मिलकर ही लेते हैं और इसी से जुड़े नियम Coinage Act में लिखे गए हैं.



महात्मा गांधी की तस्वीर के साथ छापी गई एक रुपए की नोट

#10. ऑनलाइन म्यूज़ियम mintageworld.com के CEO सुशील अग्रवाल बताते हैं कि त्योहारों और शादियों के मौके पर एक रुपए के नोट की गड्डी 15 हज़ार रुपए तक में बिकती है. बाकी जिन लोगों को नोट इकट्ठे करने का शौक होता है, वो कलेक्टर मार्केट्स में हज़ारों रुपए देकर इन्हें खरीदते हैं.

#11. नवंबर 1994 में एक रुपए का नोट बंद करने के बाद सरकार ने फरवरी 1995 में 2 रुपए का नोट और नवंबर 1995 में पांच रुपए का नोट भी बंद कर दिया था, लेकिन सिक्के ढालना जारी रखा था. 2015 से छपने शुरू हुए नोटों में ऊपर ‘भारत सरकार’ और नीचे ‘Government of India’ लिखा होता है. माना गया कि सिक्कों की कमी के चलते सरकार ने ये फैसला लिया था.



#12. 2015 से पहले हो रही छपाई के आखिरी साल में एक रुपए के 4 करोड़ 40 लाख नोट छापे गए थे. छपाई बंद होने के बाद RBI ने सरकार से इन्हें सिक्कों से बदल देने के लिए कहा था, लेकिन सरकार ने ऐसा नहीं किया. ये चलन में बने रहे.

#13. जून 2002 में आई RBI की सालाना रिपोर्ट में एक रुपए की नोट को लेकर आखिरी बार जो आंकड़े दिए गए थे, उनके मुताबिक मार्च 2002 तक मार्केट में एक रुपए के 308 करोड़ नोट चलन में थे.
आपको निचे दी गयी ये खबरें भी बहुत ही पसंद आएँगी।
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