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अभी-अभी: वैक्सीन लगवाने वाले मंत्री अनिल विज को लेकर आई बुरी खबर, मची खलबली



चंडीगढ़: हरियाणा के स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज की हालत मंगलवार को बिगड़ गई, जिसके बाद उन्हें पीजीआई चंडीगढ़ से शिफ्ट कर गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल में भर्ती किया गया है। कोरोना पॉजिटिव अनिल विज ने बीते 20 नवंबर को एक वॉलेंटियर के रूप में कोरोना के टीका ‘कोवैक्सिन’ का पहला ट्रायल डोज लगवाया था। उसके लगभग 15 दिन बाद उन्हें कोरोना पॉजिटिव पाया गया था। हालांकि पूर्व में विज ने सिर्फ सरकारी अस्पताल में इलाज कराने की बात कही थी, पर फेफड़ों में संक्रमण बढ़ने पर उन्हें इलाज के लिए मेदांता मेडिसिटी में भर्ती किया गया है।

कोरोना वैक्सीन के ट्रायल में शामिल होने के बाद कोरोना के संक्रमण का शिकार हुए अनिल विज की हालत बिगड़ने के बाद उन्हें पीजीआई रोहतक में प्लाज्मा थेरेपी देने का फैसला हुआ था। फिर पीजीआई रोहतक में हालत खराब होने के बाद उन्हें मेदांता में लाया गया है। अनिल विज को मेदांता में मंगलवार की रात लगभग 9 बजे एडमिट किया गया है। उन्हें वहां पर डॉक्टरों की टीम की निगरानी में रखा गया है।

इससे पहले अनिल विज को अंबाला के सिविल अस्पताल में भर्ती कराया गया था। वहां से बेहतर इलाज के लिए उन्हें पीजीआई रोहतक में शिफ्ट किया गया था। गौरतलब है कि कोवैक्सीन के तीसरे चरण के ट्रायल के दौरान हरियाणा के स्वास्थ्य मंत्री 67 वर्षीय अनिल विज ने वैक्सीन का पहला डोज लिया था।

इसके लगभग 15 दिनों बाद 5 दिसंबर को वह कोरोना संक्रमित हो गए। कोवैक्सीन को भारत बायोटेक की तरफ से तैयार किया जा रहा है। उन्हें अंबाला कंटोनमेंट के सिविल अस्पताल मे 20 नवंबर को ‘कोवैक्सिन’ की डोज दी गई थी।

कोरोना वायरस के खिलाफ कोवैक्सीन के क्लिनिकल ट्रायल में पहली डोज लेने के बावजूद हरियाणा के गृह और स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज कोरोना पॉजिटिव हो गए थे। विज को भारत बायोटेक द्वारा विकसित की गई कोवैक्सीन की डोज दी गई थी। विज के संक्रमित होने पर मचे बवाल के बाद भारत बायोटेक ने बयान जारी कर सफाई दी थी।

भारत बायोटेक ने कहा था कि कोवैक्सिन को दो डोज के लिए डिजाइन किया गया है और दोनों डोज लेने के 14 दिन के बाद ही ये प्रभावकारी होगी। कंपनी ने बताया था कि कोवैक्सीन क्लिनिकल ट्रायल दो खुराक पर आधारित है, जो 28 दिनों में दिया जाना है।

वैक्सीन कितना प्रभावी है, ये दोनों खुराक ले लेने के 14 दिन के बाद ही पता लगेगा। कंपनी ने कहा था कि तीसरे चरण के ट्रायल डबल-ब्लाइंड और रैंडमाइज्ड होते हैं, जिसमें ट्रायल में भाग लेने वाले 50% लोग टीका प्राप्त करते हैं और 50% प्लेसीबो प्राप्त करते हैं। आपको निचे दी गयी ये खबरें भी बहुत ही पसंद आएँगी।
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