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जिन टावरों को अंबानी का समझकर किसानों ने तोड़ा, वो तो किसी ओर के निकले




नए किसान बिल के खिलाफ किसानों का प्रदर्शन कई महीनों से चल रहा है और हर गुजरते दिन के साथ उग्र होता जा रहा था। पहले जो किसान सिर्फ यातायात रोक रहे थे अब वह तोड़फोड़ पर उतारू हो चुके हैं। पंजाब में तो रिलायंस जियो के कई मोबाइल टावरों को नुकसान पहुंचाया गया है। बहुत सारे किसानों ने रिलायंस जियो से अपना नंबर विरोधी मोबाइल कंपनियों में पोर्ट भी करा लिया है। किसानों का मानना है कि जिस कृषि बिल का वह विरोध कर रहे हैं, उसे मुकेश अंबानी को भी फायदा पहुंचाने के मकसद से लाया गया है। लेकिन क्या किसान जो टावर तोड़ रहे हैं वह वाकई मुकेश अंबानी या रिलायंस जियो के हैं?

ब्रुकफील्ड को टावर बिजनेस बेच चुका है रिलायंस!

रिलायंस इंडस्ट्रीज ने सितंबर 2020 में इस बात की घोषणा कर दी थी कि जियो के दूरसंचार टावर असेट्स को कनाडा की ब्रुकफील्ड इंफ्रास्ट्रक्चर पार्टनर्स एलपी को बेचा जा चुका है। ब्रुकफील्ड टावर कंपंनी ने 100 फीसदी इक्विटी हिस्सेदारी खरीदी है यानी पूरा टावर बिजनेस अब ब्रुकफील्ड का है। यह डील 25,215 करोड़ रुपये में हुई थी। रिलायंस ने तो यह भी कहा था कि डील से मिले पैसों का इस्तेमाल जियो इंफ्राटेल का कर्ज चुकाने में किया जाएगा। यानी किसान जो टावर मुकेश अंबानी के रिलायंस जियो का समझ कर तोड़ रहे हैं, वह दरअसल कनाडा की ब्रुकफील्ड का है।

हालांकि, जियो को हो रहा है नुकसान!

भले ही टावर रिलायंस जियो के ना हों, लेकिन रिलायंस जियो का बुनियादी ढांचा जरूर हैं। यानी ये तो साफ है कि टावरों को नुकसान पहुंचाए जाने से रिलायंस जियो को नुकसान तो हो ही रहा है। बिना टावर के मोबाइल नेटवर्क काम नहीं करेगा और बिना मोबाइल नेटवर्क के फोन का कोई फायदा नहीं। ऐसे में दूरसंचार व्यवस्था बाधित होने की वजह से रिलायंस जियो के रेवेन्यू पर थोड़ा ही सही, लेकिन असर तोड़ ही रहा है।

किसान क्यों नुकसान पहुंचा रहे हैं रिलायंस जियो के टावरों को?

दूरसंचार टावरों को नुकसान पहुंचाने के पीछे यह कहानी कही जा रही है कि नये कृषि कानूनों से मुकेश अंबानी और गौतम अडाणी जैसे उद्योगपतियों को लाभ होगा। इस आधार पर पंजाब में विभिन्न स्थानों पर रिलायंस जियो के टावरों को नुकसान पहुंचाया गया है जिससे दूरसंचार संपर्क व्यवस्था पर असर पड़ा। अंबानी और अडाणी के विरोध में पंजाब की कई जगहों पर रिलायंस जियो के टावर को नुकसान पहुंचाया गया जिससे दूरसंचार संपर्क व्यवस्था पर असर पड़ा। अब तक करीब 1500 टावर को नुकसान पहुंचाया जा चुका है। मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह की अपील के बाद भी कोई खास असर नहीं हुआ है। आपको निचे दी गयी ये खबरें भी बहुत ही पसंद आएँगी।
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