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मांग में सिंदूर लगाने के 1 नहीं बल्कि 4 कारण, तीसरा तो हर महिला को पसंद..#..



हिन्दू धर्म पूरी तरह से संस्कृति और परम्पराओं के ऊपर निर्भर है। हिन्दू धर्म में कई ऐसी प्राचीन परम्पराएँ हैं जो सदियों से चली आ रही हैं और जिनका पालन लोग आज भी करते हैं। कहा जाता है कि इन्ही प्राचीन परम्पराओं की वजह से भारत पूरी दुनिया में अपनी एक अलग पहचान बनाये हुए हैं. हिन्दू धर्म की कुछ प्राचीन का वैज्ञानिक महत्व भी है। हालाँकि बहुत कम लोग ही हैं जो इसके वैज्ञानिक महत्वों के बारे में जानते हैं। ज्यादातर लोग इसे एक रुढ़िवादी परम्परा के तौर पर देखते हैं।

इन्ही में से एक हैं हिन्दू धर्म की शादीशुदा महिलाओं का सिंदूर लगाना। अक्सर आपने हिन्दू धर्म की सभी शादीशुदा महिलाओं को सिंदूर लगाते हुए देखा होगा।

हिन्दू धर्म में सिंदूर को सुहाग के प्रतिक के रूप में भी माना जाता है। हिन्दू धर्मशास्त्रों में सिंदूर लगाने को लेकर कई नियम बताये गए हैं। इससे सम्बंधित कई बातों का जिक्र किया गया है, जिनका पालन करने पर महिलाओं के साथ ही उनके परिवार को काफी लाभ मिलता है। इसी के साथ सिंदूर किसी भी स्त्री के अखण्ड़ सुहागिन होने का प्रतीक माना जाता है और हिन्दू धर्म की मान्यता के अनुसार सिंदूर लगाने से स्त्री के पति के आयु में वृद्धि होती है और स्त्री के सौभाग्य की दरवाजें खुलते हैं।

आइए जानते हैं इसके और कारण..

कहा जाता है हिन्दू धर्म के अनुसार अगर पत्नी के बीच मांग में सिन्दूर लगा हुआ है तो उसके पति की अकाल मृत्यु नहीं हो सकती और हर संकट में पति को यह सुरक्षित रखता है। इसी के साथ ही पत्नी और पति के बीच के संबंधों को भी यह मजबूत करता है। कहा जाता है दिवाली और नवरात्र के दौरान पति द्वारा पत्नी के मांग में सिन्दूर लगाना काफी शुभ हो जाता है।

कहते हैं हिन्दू धर्म में सिन्दूर का उल्लेख रामायण काल से ही मिलता है। बताया गया है कि रामायण की पात्र सीता माता सिन्दूर का प्रयोग किया करती थी और एक बार हनुमान जी ने सीता माता से पूछा था कि आप सिन्दूर क्यों लगाती हैं इस पर सीता माता ने कहा था कि इससे भगवान राम को खुशी मिलती है। कहा जाता है खुशी मिलने के कारण शरीर स्वस्थ रहता है, और इससे आयु में वृद्धि होती है।

सामुद्रिक शास्त्र के अनुसार सिंदूर लगाने से सुहागन स्त्री की सुन्दरता में वृद्धि होती है और स्त्री के दोषों से मुक्ति मिलती है। इसी के साथ सिंदूर लगाने से माता पार्वती सौभाग्यवती होने का आशीर्वाद देती हैं।

कहा जाता है पौराणिक कथाओं के अनुसार माता लक्ष्मी के सम्मान का प्रतिक सिन्दूर माना जाता है और माता लक्ष्मी पृथ्वी के चार स्थानों पर निवास करती हैं जिसमें से एक स्त्री की सिर है। इस कारण से मांग में सिंदूर लगाया जाता है। 
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