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बच्चों ने 2100 पन्नों में उतार दी रामायण, दो छोटे भाई-बहन का लॉकडाउन मे कमाल



कोरोना काल में बहुत कुछ बुरा हुआ तो बहुत अच्छा भी हुआ। इस समय कई लोगों की प्रतिभा निखर कर सामने आई। इसमें एक कहानी राजस्थान के जालौर के रहने वाले छोटे-भाई बहन की है। इन दोनों मासूम भाई-बहन ने ऐसा कारनामा कर दिया, जिससे हर कोई हैरान है। दोनों बच्चों ने लॉकडाउन के दौरान रामायण देखी थी, जो उन्हें काफी पसंद आई। इसके बाद उन्होंने तीन बार रामचरितमानस पढ़ी और उसे 2100 पन्नों में उतार दिया।

आठ महीनों में यह कामयाबी
बता दें कि कोरोना की वजह से देश में 25 मार्च 2020 को लॉकडाउन लग गया था। राजस्थान के जालौर में एक शिक्षक के तीसरी और चौथी कक्षा में पढ़ने वाले दो बच्चों ने कोरोना को अवसर के रुप में लेते हुए इक्कीस सौ से अधिक पृष्ठों में संपूर्ण रामायण लिख दी। जालौर के आदर्श विद्या मंदिर विद्यालय के चौथी कक्षा में पढ़ने वाले माधव एवं उसकी बहन तीसरी कक्षा की अर्चना ने उनके पिता जालौर जिले के रेवत स्थित राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय में शिक्षक संदीप जोशी के प्रोत्साहन के कारण कोरोना काल में पिछले आठ महीनों में यह कामयाबी हासिल की।

20 कॉपियों में लिखी रामायण
जानकारी के मुताबिक, तीसरी कक्षा में पढ़ने वाले माधव जोशी और चौथी कक्षा में पढ़ने वाली अर्चना ने यह कारनामा किया। उन्होंने रामायण के अलग-अलग खंडों को कुल 20 कॉपियों के करीब 2100 पन्नों में उतार दिया।

इस वजह से लिखी रामायण
बताया जा रहा है कि लॉकडाउन के दौरान दूरदर्शन पर रामायण दिखाई गई थी। उसे काफी पसंद भी किया गया। उसी दौरान माधव और अर्चना ने भी रामायण देखी। इसके बाद उन्होंने को लोग खूब देख रहे थे और पसंद की जा रही थी, उसी दौरान इन बच्चों के मन में पूरी रामायण पेन से लिखने की बात आई और उसके बाद उन्होंने तीन बार रामचरितमानस भी पढ़ी।

इन बच्चों के पिता संदीप जोशी ने बताया कि बच्चों ने कोरोना काल में दूरदर्शन पर रामायण देखने की इच्छा के चलते उन्हें कोरोना काल को अवसर के रुप में लेते हुए दोनों बच्चों की रुचि के मद्देनजर उन्हें रामायण लिखने के लिए प्रोत्साहित किया गया और दोनों ने मिलकर यह कामयाबी हासिल की

जालौर के आदर्श विद्या मंदिर विद्यालय में पढ़ने वाले माधव और अर्चना ने पूरी रामायण को सात हिस्सों में लिखा। उन्होंने श्री रामचरितमानस बाल कांड, अयोध्या कांड, अरण्य कांड, किष्किंधा कांड, सुंदर कांड, लंका कांड और उत्तर रामायण का संपूर्ण जिक्र किया। इनमें माधव ने 14 कॉपियों में बाल कांड, अयोध्या कांड, अरण्य कांड और उत्तर कांड लिखा, जबकि अर्चना ने छह कॉपियों में किष्किंधा कांड, सुंदर कांड और लंका कांड लिखा। बच्चों का कहना है कि उन्हें रामायण की पूरी जानकारी हो गई। साथ ही, रामचरितमानस में दोहे, छंद और चौपाइयों की संख्या भी याद हो गई।

बच्चों के रामायण लिखने से उनके पढ़ने एवं लिखने का स्वभाव बना। उनकी लेखनी में सुधार हुआ। इसके साथ ही उन्हें सांस्कृतिक धरोहर का ज्ञान भी हुआ। इससे दोनों को रामकथा समझ में आई और उन्हें यह याद भी हो गई।
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