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किसान आंदोलन में ठंड और बारिश बनी जान की दुश्मन, अब तक 40 किसानों की मौत –



नई दिल्ली: किसान आंदोलन का रविवार को 39 वां दिन है। कड़कड़ाती ठंड और कोहरे समेत कई अन्य तरह की मुसीबतों के बावजूद दिल्ली की सीमाओं पर किसान अभी भी डटे हुए हैं। किसान पहले ही तमाम तरह की परेशानियों का सामना कर रहे थे, लेकिन आज सुबह से हो रही बारिश ने उनकी मुसीबतों को और भी ज्यादा बढ़ाने का काम किया है। अब मानवता की दृष्टि से भी किसानों का आंदोलन दर्दनाक रूप लेता जा रहा है।
शनिवार को एक किसान ने सरकार से परेशान होकर आत्महत्या कर ली थी। उनकी चिता अभी ठंडी भी नहीं हुई कि रविवार सुबह अलग-अलग प्रदर्शन स्थल पर तीन और किसानों की मौत हो गई।

किसानों की मौत की खबर से आन्दोलन में भाग ले रहे बाकी के किसान बेहद दुखी हैं। वे सरकार से अपील कर रहे हैं कि उनकी मांगे पूरी की जाए ताकि किसान जल्द अपना आन्दोलन खत्म करके अपने घर सही सलामत वापस लौट जाए।

टीकरी बॉर्डर पर किसान की मौत
टीकरी बॉर्डर रविवार सुबह एक किसान ने दम तोड़ दिया। उसकी शिनाख्त जगबीर सिंह (60) के रूप में हुई है। बताया जा रहा है कि जींद जिले के गांव इट्टल कला के रहने वाले जगबीर की मौत अत्यधिक ठंड के कारण हुई है। लेकिन जांच पूरी होने के बाद ही मौत की असली वजह का मालूम पड़ेगी। आन्दोलन में भाग लेने आये साथी प्रदर्शनकारियों ने बताया कि वो हफ्ते भर से पिलर नंबर 764 पर डटे हुए थे। रविवार सुबह करीब सात बजे तबीयत अधिक बिगड़ने के बाद उनकी मौत हो गई। जगबीर के दो बच्चे हैं। उनके एक 32 वर्षीय लड़के और 28 वर्षीय लड़की हैं। भारतीय किसान यूनियन (घासीराम नैन) के अध्यक्ष चौधरी जोगिंदर नैन ने बताया कि सुबह लोगों ने चाय पीने के लिए बुलाया तो उन्होंने बताया कि बेचैनी हो रही है। हालत ज्यादा खराब होने लगी, तो साथी प्रदर्शनकारी उन्हें बहादुरगढ़ अस्पताल लेकर गए, लेकिन अस्पताल पहुंचने से पहले ही उन्होंने दम तोड़ दिया।

सोनीपत में दो किसानों ने तोड़ा दम
वहीं सोनीपत के कुंडली बॉर्डर पर चल रहे किसान आंदोलन में शामिल दो और किसानों ने आज दम तोड़ दिया। वहीं एक अन्य की हालत गंभीर है। मृतकों की पहचान सोनीपत के गांव गंगाना निवासी कुलबीर सिंह व पंजाब के जिला संगरूर के गांव लिदवा निवासी शमशेर सिंह के रूप में हुई है। वहीं गंगाना के ही युद्धिष्ठर को हृदयघात के चलते पीजीआई रोहतक रेफर किया गया है।

शनिवार को बाबा कश्मीर सिंह ने किया था सुसाइड
इससे पहले शनिवार को दिल्ली बॉर्डर पर चल रहे किसानों के आंदोलन में रामपुर के किसान बाबा कश्मीर सिंह ने सुसाइड कर लिया था। उन्होंने अपने सुसाइड नोट में सरकार को अपने इस कदम के लिए जिम्मेदार ठहराया था। उसने अपने पत्र में लिखा था कि आखिर हम कब तक यहां सर्दी में बैठे रहेंगे। ये सरकार सुन नहीं रही है और इसलिए अपनी जान देकर जा रहा हूं ताकि कोई आन्दोलन का कोई समाधान निकल सके।
आपको निचे दी गयी ये खबरें भी बहुत ही पसंद आएँगी।
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