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तांत्रिक के झांसे में ऐसा फंसा पढ़ा-लिखा परिवार, 7 लाख में खरीदे 4 कबूतर, और फिर…-

 

महाराष्ट्र में अंधविश्वास के नाम पर ठगी करने का बड़ा मामला सामने आया है। पुणे में एक परिवार तांत्रिक के झांसे में ऐसा फंसा कि उसके 7 लाख रुपए डूब गए। बाद में जब उन्हें तांत्रिक की असलियत के बारें में पता चला तो उन्होंने उसके खिलाफ थाने पहुंचकर शिकायत दर्ज करा दी। जिसके बाद पुलिस ने आरोपी को अरेस्ट कर जेल भेज दिया।

दरअसल ये पूरा मामला कुछ यूं हैं कि पुणे के कोंढवा इलाके में रहने वाला एक परिवार अपने घर के एक सदस्य की बीमारी को लेकर बहुत परेशान था। घरवालों ने बीमार बेटे का कई अस्पतालों में इलाज कराया लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ।

पढ़ा लिखा परिवार ऐसे आ गया झांसे में
किसी ने उन्हें तात्रिंक कुतबुद्दीन नजम के बारे में बताया। बाद में उसी ने तात्रिंक कुतबुद्दीन नजम से मुलाकात भी कराई। प्राप्त जानकारी के अनुसार आरोपी तांत्रिक कुतबुद्दीन ने परिवार से कहा था कि तुम्हारे बेटे पर किसी ने काला जादू किया है, जिसकी वजह से उसकी मौत हो सकती है।

मौत का डर दिखाकर बाबा ने पीड़ित परिवार को साढ़े 6 लाख 80 हजार रुपये के कबूतर खरीदने के लिए कहा था। यानी एक कबूतर 1 लाख 70 हजार रुपये का। परिवार ने बीमार बेटे के ठीक होने की उम्मीद से इतनी बड़ी रकम भी खर्च करने की बात मान ली।

तांत्रिक ने पीड़ित परिवार से कहा कि कबूतर खरीदने से बेटे की मौत टल जाएगी और उसकी जगह इन कबूतरों की मौत हो जाएगी। ऐसे परिवार के अंदर अंधविश्वास पैदा हो गया और झट से तांत्रिक की बात मानकर उसे पैसे दे दिये।

ऐसे खुली तांत्रिक की पोल
उन्होंने काफी दिन तक इन्तजार किया लेकिन जब बेटे के स्वास्थ्य में कोई सुधार नहीं हुआ और जनवरी भी आधा निकल गया। फिर तांत्रिक से पूछा कि बेटे की तबीयत में कोई सुधार क्यों नहीं हो रहा। इस बात पर तांत्रिक टालमटोल करता रहा। हर बार यही कहता कि इंतजार करो, बेटा ठीक हो जाएगा। आखिर परिवार के सब्र का बांध टूट गया। उन्होंने फिर इस सारे मामले की जानकारी अंधश्रद्धा निर्मूलन समिति को दी।

अंधश्रद्धा निर्मूलन समिति से जुड़े मिलिंद देशमुख और नंदिनी जाधव ने मामले का संज्ञान लिया। कोंढवा पुलिस स्टेशन में जादू-टोना निवारण कानून के तहत शिकायत दर्ज कराई गई। पुलिस ने तांत्रिक कुतबुद्दीन को बुधवार को गिरफ्तार कर लिया गया। तांत्रिक से तीन लाख रुपए भी बरामद किए गए। अभी बाकी की रकम उससे वसूले जाना बाकी है।
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