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भगवान शिव और हनुमान जी का ये रहस्य, जानकर पैरों तले खिसक जाएगी जमीन



आपको जानकर हैरानी होगी कि हनुमान जी और कोई नहीं बल्कि भगवान शिव के ही एक अवतार हैं। यह बात कई ग्रंथों, पुराणों में पढ्ने को मिल जाती हैं कि भगवान शिव ने ही हनुमान जी का अवतार लिया था लेकिन क्या आपको पता है कि आखिर उन्हें किस कारण हनुमान का अवतार लेना पडा? आईये आज हम इस राज पर से पर्दा उठाते हैं। भगवान शिव और हनुमान जी के अद्भूत रहस्य

भगवान शिव ने लिया वानर अवतार

यह कहानी त्रेता युग में रामायण के समय से जुड़ी हुई है। एक बार शिवजी अपनी पत्नी पार्वती से बोले कि हे पार्वती! क्या तुम जानती हो कि मेरे राम ने पृथ्वीलोक में जन्म लिया हैं। मैं उनके दर्शन और सेवा करना चाहता हूँ। मेरी इच्छा हैं कि मैं भी पृथ्वीलोक पर जाकर उन्ही के साथ वहां रहूँ। लेकिन बाद में शिव जी को एहसास हुआ कि पार्वती जी उनके बिना नहीं रह सकती हैं। यदि वो चले गए तो पार्वती अपने प्राण त्याग देगी। ऐसे में शिवजी बड़ी दुविधा में फंस गए. एक तरफ तो उन्हें पार्वती के साथ भी रहना हैं और दूसरी तरफ धरती पर जाकर श्रीराम की सेवा भी करनी हैं। इसलिए वो अपने 11 रुद्र अवतारों में से एक वानर के रूप में नया जन्म लेते है जिसे बाद में हनुमान के नाम से जाना गया।

आज भी जीवित हैं हनुमान

शास्त्रों के अनुसार भगवान शिव को ये पहले से ही ज्ञात था कि कलयुग में ना तो वे रहेंगे और ना ही श्रीराम रहेंगे। ऐसे में उन्होंने पृथ्वीलोक के कल्याण के लिए हनुमान जी का रूप लिया धार्मिक मान्यता के अनुसार हनुमान जी को अमरता का वरदान भी प्राप्त हैं। यही वजह है कि आज भी हनुमान जी धरतीलोक पर जीवित हैं और अपने भक्तों के कष्टों को हरते हैं। समय समय पर इस बात के कई साबूत मिले हैं कि हनुमान जी इस धरती पर आज भी मौजूद हैं।

इन्हीं कारणों की वजह से ही जब कोई भक्त हनुमान जी को प्रसन्न कर देता हैं तो उनकी मनोकामनाएं बहुत शीघ्र पूर्ण हो जाती हैं। हनुमान जी के पास उपलब्ध इतनी महाशक्तियां होने का एक कारण यह भी हैं कि वो भगवान शिव का ही एक अवतार हैं। 
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