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औरंगजेब के बड़े भाई दारा शिकोह की कब्र क्यों तलाश रही मोदी सरकार? कारण जानकर हैरत में पड़ जाएंगे


भारत सरकार ने दारा शिकोह की कब्र तलाशने का आदेश दिया है. दारा शिकोह 17वीं शताब्दी के मुगल शहजादे थे, जिनके बारे में कहा जाता है कि उन्हें दिल्ली में हूमायूं के मकबरे में कहीं दफन किया गया है. लेकिन इसमें कितनी सच्चाई है, इसका पता लगाने के लिए केंद्र सरकार ने पुरातत्वविदों की एक कमेटी बनाई है. यह कमेटी साहित्य, कला और वास्तुकला के आधार पर दारा शिकोह की कब्र पहचानने की कोशिश कर रही है.

इस बीच दिल्ली नगर निगम के एक इंजीनियर ने दावा किया है कि उन्होंने दिल्ली स्थित हूमायूं के मकबरे में दारा शिकोह की कब्र का पता लगा लिया है. इस इंजीनियर का नाम संजीव कुमार सिंह है जो यूपी के आगरा के रहने वाले हैं.

कहा जा रहा है कि संजीव सिंह ने कब्र खोजने से पहले देश के कई अन्य कब्रों का अध्ययन किया. यहां तक कि हूंमायूं के मकबरे में भी कई बार गए. अलग-अलग कब्रों का बारीकी से अध्ययन करने के बाद वे आश्वस्त हुए कि हूमायूं के मकबरे में ही दारा शिकाह की कब्र है.

दारा शिकोह को जेल में डाला

हूमांयू के मकबरे के तहखाने में 150 से ज्यादा कब्र हैं. उन कब्रों में यह निश्चित करना कि दारा शिकोह की कौन सी कब्र है, काफी मुश्किल काम था. लेकिन संजीव कुमार सिंह ने इंटरनेट के माध्यम से कई कब्रों का अध्ययन कर और आलमगीर नामा से जानकारी जुटा कर वे दारा शिकोह की कब्र को तय कर पाए. दारा शिकोह शाहजहां के सबसे बड़े बेटे थे. लिहाजा सिंहासन के वे ही उत्तराधिकारी थे. लेकिन उनके छोटे बेटे औरंगजेब ने अपने पिता को हटा कर आगरा की जेल में डाल दिया और खुद गद्दी पर बैठ गया. औरंगजेब ने दारा शिकोह को भी जेल में डाल दिया.

इतिहासकार मोहम्मद काजिम इब्ने मोहम्मद अमीन मुंशी की एक प्रसिद्ध किताब है जिसका नाम है आलमगीर नामा जिसमें दारा शिकोह के बारे में जानकारी दी गई है. इस किताब में बताया गया है कि दारा शिकोह की कब्र कहां खोदी गई है. आलमगीर नामा में अमीन मुंशी ने लिखा है कि दारा शिकोह को हुमायूं के मकबरे में उस गुंबद के नीचे दफनाया गया था जहां अकबर के बेटे दानियाल और मुराद दफन हैं. बाद में इसी जगह तैमूर वंश के शहजादों और शहजादियों को दफन किया गया था.

संस्कृति मंत्रालय करेगी जांच

अब 11 जनवरी को संस्कृति मंत्रालय की कमेटी हुमायूं मकबरे का दौरा कर दिल्ली नगर निगम के इंजीनियर संजीव कुमार सिंह के दावे का अंतिम तौर पर सच जानेगी, जिसमें उन्होंने मकबरे में दाराशिकोह की कब्र खोजने का दावा किया है. खास बात है कि जिस हुमायूं मकबरे में दारा शिकोह की कब्र खोजने का दावा किया गया है, उससे साढ़े पांच किलोमीटर की दूरी पर ही दारा शिकोह रोड भी है. मुगल शासक शाहजहां के चार बेटों में से एक दारा शिकोह की 1659 में उसके ही भाई औरंगजेब ने राजगद्दी के लिए हत्या कर दी थी.

क्यों तलाश रही सरकार

दारा शिकोह भारतीय उपनिषद और भारतीय दर्शन का विद्वान होने के साथ उदारवादी भी था. उदारवादी नजरिए के कारण ही मुगल शासकों में सिर्फ दारा शिकोह के चरित्र को भारतीय जनता पार्टी का मातृसंगठन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ पसंद करता है. ऐसे में वर्तमान सरकार में दारा शिकोह की कब्र की चल रही इस खोज के काफी मायने हैं.

हुमायूं मकबरे में दारा शिकोह की कब्र का पता लगाने के लिए गुरुवार को हुई बैठक के बाद कमेटी के सदस्य बीआर मणि ने बताया है कि आज की बैठक में तय हुआ है कि जनवरी में कमेटी के सदस्य साइट विजिट करेंगे. दिल्ली नगर निगम के इंजीनियर संजीव कुमार सिंह को भी बुलाया जाएगा. उसके बाद ही दारा शिकोह की कब्र पर कोई निर्णय होगा. कमेटी के दौरे के बाद रिपोर्ट मिनिस्ट्री को जाएगी. कुछ मेंबर इससे पूर्व भी साइट का विजिट कर चुके हैं.

संजीव सिंह ने खोजी क्रब!

दरअसल, दिल्ली नगर निगम के इंजीनियर संजीव कुमार सिंह ने हुमायूं मकबरे में जिस कब्र को दारा शिकोह की बताई है, उस दावे से कमेटी के अधिकांश सदस्य सहमत हैं. संजीव कुमार सिंह के दावे भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआइ) के अनुमानों से भी मैच करते हैं. संस्कृति मंत्रालय ने हुमायूं के मकबरे में दफन दारा शिकोह की कब्र ढूंढने के लिए इस साल जनवरी में कमेटी बनाई थी. इस कमेटी में आरएस बिष्ट, बीआर मणि, केएन दीक्षित, डॉ. केके मुहम्मद, सैयद जमाल हसन, बीएम पांडेय शामिल हैं. यह कमेटी कब्र खोजने में जुटी हुई थी कि दक्षिणी नगर निगम के इंजीनियर संजीव कुमार सिंह ने एक रिपोर्ट पेश कर सबको चौंका दिया.

क्या लिखा आलमगीर नामा में

संजीव कुमार सिंह ने औरंगजेब के जमाने में आधिकारिक इतिहास लिखने वाले मोहम्मद काजिम की फारसी में लिखी पुस्तक आलमगीर नामा का अनुवाद कराया तो पता चला कि उसमें दारा शिकोह के कत्ल और लाश दफ्न करने के बारे में पूरी जानकारी है. किताब में लिखा गया है कि दारा की लाश को हुमायूं के मकबरे में गुंबद के नीचे बने तहखाने में दफ्न किया गया, जहां पहले से अकबर के बेटों डानियल और मुराद दफ्न हैं.

संजीव कुमार सिंह ने बताया, “पिछले चार वर्षों के प्रयास के बाद वह कब्र खोजने में सफल रहे. हर जमाने की कब्रों की शैली के अध्ययन के बाद दारा शिकोह की कब्र तक पहुंचे. आलमगीर नामा पुस्तक ने उन्हें रास्ता दिखाया. उन्होंने शौकिया यह कार्य करते हुए कमेटी के सामने अपनी रिपोर्ट रखी, जिसकी सभी ने प्रशंसा की. जो चीज अंधेरे में रही, उसे रोशनी में लाने की खुशी है.”
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