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खुदाई में मिली ऐसी चीज की पुरातत्व विभाग की भी खुली रह गईं आंखें, 3 फीट नीचे दबा था तबाही का साजो-सामान


हिमाचली खबर  महाराष्ट्र के कोल्हापुर में पवनगढ़ किले के आस-पास के इलाकों की खुदाई में 400 से भी ज्यादा तोप के गोले बरामद हुए हैं. माना जा रहा है कि ये गोले 16वीं-18वीं शताब्दी में छत्रपति शिवाजी के शासनकाल के दौरान के हैं. हालांकि खुदाई का काम एक हफ्ते से चल रहा है, लेकिन गुरुवार दोपहर को सबसे पहले तोप के गोले बरामद किए गए. सोशल मीडिया पर भी लोग इन तोप के गोलों को देखकर हैरान हो रहे हैं.

पवनगढ़ का किला पश्चिमी घाट की पहाड़ियों के बीच स्थित उन दुर्गो में से एक है जिसका निर्माण 17वीं शताब्दी में छत्रपति शिवाजी महाराज ने कराया था. यह किला पनहला दुर्ग से एक किलोमीटर पूर्व में है. घने जंगलों के बीच स्थित इन दोनों किलों केबीच से एक छोटी नदी गुजरती है.

पिछले दो दिनों से वन विभाग के अधिकारी और कुछ स्थानीय किला-प्रेमियों की एक टीम इस दुर्ग के आस-पास पर्यटकों के लिए साइनबोर्ड लगाने के लिए स्थलों की खुदाई कर रहे थे. इसी दौरान उन्हें यह गोले मिले.

ये गोले अलग-अलग वजन के हैं

इस टीम की एक सदस्य मारुति पाटिल ने बताया कि ये गोले अलग-अलग वजन के हैं. इनमें से कई 100 ग्राम के तो कई सात किलो के भी हैं. इन्हें 2*3 फीट के आयताकार बक्से में जमीन के तीन फीट नीचे गड्ढों में रखा गया था. उन्होंने बताया कि आगे खुदाई जारी रखने पर इस तरह के और भी गोले मिलने की संभावना है.

हालांकि खुदाई का काम एक सप्ताह से चल रहा है, लेकिन गुरुवार दोपहर को सबसे पहले तोप के गोले बरामद किए गए. इसके बाद टीम के सदस्यों में कौतुहल और बढ़ गया. पाटिल ने कहा कि पहला गोला मिलने के बाद जब हमलोगों ने सुनियोजित ढंग से खुदाई प्रारंभ की तो और भी गोले मिलते गए और दो दिनों में इनकी संख्या 406 तक पहुंच गई. इन तोप के गोलों को पनहला स्थित पुरालेख विभाग के पास जमा करा दिया गया है. इसके बाद पुणे से भी आर्कियोलॉजिस्ट का एक दल सर्वे के लिए घटनास्थल पर पहुंच गया है.
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