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BIG NEWS: देशभर में किसानों को चक्का जाम, आमने-सामने फोर्स-किसान, जानें ताजा हालात



नई दिल्ली। कृषि कानूनों के खिलाफ आज किसान रेल रोको आंदोलन कर रहे हैं, इसके चलते देशभर में सुरक्षा बढ़ा दी गई है. किसानों के रेल रोको अभियान के मद्देनजर रेलवे ने पंजाब, हरियाणा, यूपी, पश्चिम बंगाल पर ध्यान केंद्रित करने के साथ ही रेलवे सुरक्षाबलों की 20 अतिरिक्त कंपनियां तैनात की है. बता दें कि संयुक्त किसान मोर्चा ने कृषि कानूनों को निरस्त किए जाने की मांग को पिछले सप्ताह रेल रोको आंदोलन की घोषणा की थी. रेल रोको आंदोलन 12 से 4 बजे तक किया जाएगा.

संवेदनशील रेलवे स्टेशनों के बाहर पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई है. उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद जंक्शन पर बड़ी संख्या में पुलिसकर्मी मौजूद हैं. उत्तर प्रदेश और हरियाणा के कई स्टेशनों के अंदर-बाहर बड़ी संख्या में पुलिस की तैनाती है. RPF के अतिरिक्त जवानों की संख्या भी बढ़ाई गई है.

हापुड़ जंक्शन, गढ़मुक्तेश्वर, धौलानाऔर पिलखुवा रेलवे स्टेशन की सुरक्षा कड़ी कर दी गई है. इन चार रेलवे स्टेशनों के लिए चार मजिस्ट्रेट भी तैनात किए गए हैं.

ये संवेदनशील रेलवे रूट माने जा रहे हैं-

दिल्ली-लखनऊ रुट
दिल्ली- रोहतक-जींद-जाखल-भटिंडा लाईन
दिल्ली- पानीपत-करनाल-अंबाला लाईन
दिल्ली-मुरादाबाद-सहारनपुर-मेरठ-अंबाला
दिल्ली-पलवल-मथुरा-कोटा लाईन
दिल्ली-पलवल-मथुरा- झांसी-लाईन

मुरादाबाद में सहारनपुर की ओर जाने वाली ट्रेनों को रोके जाने की संभावना भी है. सुरक्षा के लिए RPF की अतिरिक्त तैनाती भी की गई है. राज्यों की पुलिस भी अलर्ट पर है.

भारतीय किसान यूनियन ने अपील की है कि किसी तरह की कोई हिंसा या परेशानी यात्रियों को नहीं आने दी जाएगी. संगठन के प्रवक्ता राकेश टिकैत ने कहा कि आंदोलनकारी पूरा ध्यान रखेंगे कि यात्रियों को परेशानी न हो. उन्होंने यह भी कहा कि ‘हम लोगों को पानी, दूध, लस्सी और फल वगैरह देंगे और उन्हें बताएंगे कि हमारी समस्या क्या है.’

एक अधिकारी ने कहा कि रेल रोको अभियान के मद्देनजर रेलगाड़ियों की आवाजाही पर अब तक कोई निर्णय नहीं लिया गया है. एक बार जब हमें विरोध की स्थिति की तस्वीर मिल जाती है तो संवेदनशील स्थानों की पहचान हो जाती है, तो हम कार्रवाई की योजना बनाएंगे. हमारे पास लगभग 80 रेलगाड़ियां हैं जो संभावित संवेदनशील क्षेत्रों से गुजरती हैं और उनमें से ज्यादातर दोपहर 12 बजे से पहले ही गुजर जाती हैं. वहीं भारतीय किसान यूनियन के नेता गुरनाम सिंह चढूनी ने कहा था कि किसान यूनियनें चुनावों को लेकर पश्चिम बंगाल में अपना मुद्दा उठाएंगी कि लोग उन्हें वोट न दें जो उनकी आजीविका छीन रहे हैं.
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