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सिर खुजाते रह गये सरकारी नौकरी वाले, बजट में मोदी सरकार दे गई झटका



नई दिल्ली। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण का यह बजट सैलेरीड क्लास को निराश कर गया। इस बजट में न तो कोई अतिरिक्त टैक्स छूट की घोषणा की गई और न ही टैक्स स्लैब में कोई सुधार किया गया। इस बजट में सिर्फ वैसे वरिष्ठ नागरिकों के लिए एक राहत की घोषणा हुई, जो कि 75 साल से ज्यादा उम्र के होंगे। इनके लिए इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) दाखिल करने से छूट मिली।

तर्कसंगत बनाने की हो रही थी बात
कोरोना से लड़ रही अर्थव्यवस्था में इस बार बजट से पहले इनकम टैक्स स्लैब का दायरा बढ़ाने से लेकर के टैक्स की दरों को तर्कसंगत बनाने की बात हो रही है। इस बारे में कई सिफारिश वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से की गई थी।

इस बार आयकर छूट मिलने की उम्मीद सबसे ज्यादा थी
बजट में इस बार आयकर दाताओं को कर में छूट मिलने की ज्यादा उम्मीद है। इससे पहले नरेंद्र मोदी सरकार के दूसरे टर्म के लिए जुलाई में पेश किए गए पहले बजट में वित्त मंत्री ने पांच लाख तक की आय वालों को कर में छूट दी थी, लेकिन टैक्स स्लैब में किसी तरह का कोई परिवर्तन नहीं किया गया था। ऐसे में अब लोगों को उम्मीद जागी थी कि वित्त मंत्री इस बार टैक्स स्लैब में बदलाव कर सकती हैं। इससे कर दाताओं को ज्यादा वेतन घर ले जाने को मिलेगा, जिससे उनका खर्च का दायरा बढ़ेगा।

मध्यम वर्ग को थी सबसे ज्यादा उम्मीद
मध्यम वर्ग कहें या सैलेरीड क्लास,इनकी आय कम होती है, लेकिन टैक्स का बोझ ज्यादा होता है। अभी आम आदमी सबसे ज्यादा आयकर का भुगतान करता है। अभी 2.5 लाख से पांच लाख रुपये की आय पर पांच फीसदी टैक्स देना होता है। वहीं पांच से 10 लाख रुपये पर सीधे 20 फीसदी टैक्स दर लागू है। इससे करदाताओं पर सीधा असर पड़ता है। पांच से 10 लाख रुपये के लिए स्लैब को 20 फीसदी से घटाकर के 10 फीसदी करने की मांग भी वित्त मंत्री से करदाता कर रहे थे। लेकिन सबको निराशा ही हाथ लगी।
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