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कभी किसी गैर के घर में नही छोडनी चाहिये अपनी पत्नी, सुनिए क्या कहते है इस पर चाणक्य






जीवन में हम लोगो को कुछ एक चीजे है जो हमेशा ध्यान में रखनी चाहिए क्योंकि हम कितने ही अच्छे, स्वाभिमानी और साफ़ मन के हो लेकिन हम लोगो के जीवन में हमे कमी तो पड़ ही जाती है. ये बात आप भी मानते ही होंगे और इस वजह से जीवन जीने के लिये कुछ एक सूत्र निर्धारित किये जाते है जिनको अगर पालन करते हुए हम लोग चलते है तो हम लोगो के लिए ये अच्छा होता है चलिए फिर आज हम पति और पत्नी के रिश्ते को लेकर के चाणक्य का जो अंकलन है वो जान लेते है.

कभी भी अपनी पत्नी को किसी भी गैर के घर में या फिर ख़ास तौर पर एक गैर पुरुष के घर में नही छोड़ा जाना चाहिये जिसके पीछे दो कारण होते है. सबसे पहला कारण होता है चरित्र में दोष. जब आप पत्नी को पहुँच से बाहर रखते है तो उसके चरित्र में दोष लग सकता है.



इसमें फिर आप खुदको दोष भी नही दे सकते है कि आपने ऐसा क्यों किया? दूसरा कारक होता है जब पुरुष स्त्री के साथ में नही होता है तो अन्य व्यक्ति उसे एक अन्य व्यक्ति की पत्नी की तरह सम्मान नही देता है और संभावित रूप से बलपूर्वक उसे अपने वश में करने की कोशिश भी करता है जो एक स्त्री के परिदृश्य से भी बिलकुल भी उचित नही माना जाता है. इसलिए ध्यान यही रखा जाना चाहिए कि आप ऐसा बिलकुल भी न करे.

चाणक्य नीति के इसी भाग में बिना अनुभवी की सलाह के कोई काम करने या फिर तेज बहाव वाली नदी के नजदीक पेड़ लगाने यानी संकट वाली जगह पर निवेश करने पर भी रोक लगाने की बात कही गयी है. अगर व्यक्ति इन बातो का ध्यान रखते हुए जीवन में आगे बढ़ता है तो फिर उसको जीवन में काफी अधिक लाभ की प्राप्ति होती है.
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