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चीन की दुखती रग को दबा रहा भारत, पैंगोंग से हट रहा पीछे



पेइचिंग। लद्दाख में भारत और चीन के बीच पिछले साल मई से जारी तनाव में अब कुछ नरमी दिखाई दे रही है। चीनी रक्षा मंत्रालय ने दावा किया है कि सैन्य स्तर के 9वें दौर की बैठक में बनी सहमति के आधार पर पैंगोंग त्सो झील के उत्तरी और दक्षिणी किनारे से भारत और चीन अपनी-अपनी सेनाओं को पीछे हटाना शुरू कर दिए हैं। हालांकि, भारतीय सेना की तरफ से अभी तक कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। चीन की पुरानी आदतों से सतर्क भारत भी वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर कोई ढिलाई देने के मूड में नहीं है।

वन चाइना नीति से भारत के पीछे हटने से डरा चीन
साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट ने अपनी रिपोर्ट में लिखा है कि इस बात के कोई संकेत नहीं है कि दोनों देश एक दूसरे के छोड़े गए इलाके में कब्जा कर माइंड गेम को फिर से बढ़ाएंगे। दरअसल भारत और चीन के बीच यह एक माइंडगेम है। जिसमें चीन को डर है कि कहीं भारत वन चाइना नीति की अपनी स्वीकृति को वापस न ले ले। चीन इस नीति के तहत हॉन्ग कॉन्ग, ताइवान और तिब्बत को अपना अभिन्न हिस्सा बताता है। यह दुनियाभर के देशों के साथ चीन के राजनयिक संबंधों का आधार भी है।

भारत ने सबसे पहले किया था चीन की इस नीति का समर्थन
भारत ने चीन की इस नीति का खुले तौर पर समर्थन किया है। भारत इस नीति को मान्यता देने वाले पहले देशों में से एक था। इस समय ताइवान सीधे तौर पर भारत के साथ व्यापार और राजनयिक संबंध स्थापित करने की कोशिश कर रहा है। मोदी सरकार ने भी ताइवान के साथ संबंधों को लेकर नरम रूख दिखाया है। जिसके बाद से चीन के राजनयिक खेमे में चिंता बढ़ गई थी। चीन इन दिनों ताइवान, हॉन्ग कॉन्ग और तिब्बत को लेकर दुनियाभर में आलोचना का सामना कर रहा है।

चीन की दुखती नस को यूं दबा रहा भारत
इस रिपोर्ट में यह भी लिखा हुआ है कि भारत अब चीन की दुखती नस को दबाने की कोशिश में जुटा हुआ है। इसलिए हाल में ही भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP) की लद्दाख इकाई का नेतृत्व तिब्बती मूल के एक अधिकारी लहरी दोरजी लहटो को सौंपी गई है। इसके अलावा भारत जमीनी स्तर पर फायदा उठाने के लिए अपनी सेना के जवानों को तिब्बत की भाषा, संस्कृति और इतिहास सिखाने के प्रस्ताव पर विचार कर रहा है।

बाइडन प्रशासन के भारत को समर्थन से भी दबाव में चीन
दिलचस्प बाद यह है कि अमेरिका में ट्रंप की विदाई के बाद जो बाइडन प्रशासन ने भी लद्दाख विवाद को लेकर भारत का खुला समर्थन किया है। अमेरिकी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता नेड प्राइस ने मंगलवार को कहा कि अमेरिका भारत-चीन सीमा पर स्थिति की बारीकी से निगरानी कर रहा है। अमेरिका ने यह भी कहा कि पड़ोसियों को डराने के पेइचिंग के पैटर्न के बीच अमेरिका अपने दोस्तों के लिए हमेशा खड़ा रहेगा।

लद्दाख स्काउट्स और स्पेशल फ्रंटियर फोर्स भी बड़ा कारण
चीन के दबाव में आने के पीछे भारतीय सेना में शामिल लद्दाख स्काउट्स और स्पेशल फ्रंटियर फोर्स भी बड़ा कारण हैं। 1962 के युद्ध में चीन के हाथों मिली हार के बाद भारत ने लद्दाख स्काउट्स का गठन किया था। इसमें भर्ती स्थानीय युवा क्षेत्र की भौगोलिक स्थिति, भाषा, संस्कृति के अलावा मौसम से अच्छे से परिचित होते हैं। इसी तरह से भारत ने तिब्बती शरणार्थी समुदायों के पुरुषों से मिलकर एक विशेष अर्धसैनिक बल, स्पेशल फ्रंटियर फोर्स (SFF) का गठन किया था। यह फोर्स आतंकवाद रोधी और खुफिया मिशन में काम करती है।

वीके सिंह के बयान पर चीन ने साधा निशाना
चीन ने पूर्व भारतीय सेना प्रमुख और केंद्रीय मंत्री वीके सिंह के बयान पर भी तंज कसा है। वीके सिंह ने दावा किया था कि चीन की तुलना में भारतीय सेना ने एलएसी को अधिक बार पार किया है। चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता वांग वेनबिन ने इस पर जवाबी हमला देते हुए इसे एक अनकहा कबूलनामा करार दिया। चीन ने उल्टा आरोप लगाया कि भारत चीन के क्षेत्र में अतिक्रमण करने का लगातार प्रयास कर विवाद पैदा करने की कोशिश कर रहा था।
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