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यूपी में पंचायत चुनाव को लेकर आई तेजी, सरकार ने लिया बड़ा फैसला




लखनऊ। यूपी पंचायत चुनाव को लेकर हाई कोर्ट के आरक्षण प्रक्रिया पूरा कर लेने के आदेश के बाद से हलचल तेज हो गई है। हाई कोर्ट ने राज्य सरकार को 17 मार्च तक आरक्षण की अधिसूचना जारी करने का वक्त दिया है। हाई कोर्ट के आदेश के बाद आयोग 18 मार्च को पंचायत चुनाव की अधिसूचना जारी कर सकता है जिसे 30 अप्रैल 2021 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।

बता दें कि ढाई दशक बाद ऐसा होगा जब यूपी में मार्च अप्रैल में पंचायत चुनाव होंगे। इससे पहले 1995 में जब पहली बार पंचायत चुनाव हुए थे तो मार्च अप्रैल के महीने में ही हुए थे लेकिन बाद के पंचायत चुनाव दूसरे महीनों में कराए गए। राज्य निर्वाचन आयोग के अनुसार, साल 2000 में मई-जून तो 2005 में जुलाई से लेकर अक्टूबर तक पंचायत चुनाव हुए थे।

कोरोना और परिसीमन के चलते टला चुनाव
इसी तरह 2010 में सितंबर-अक्टूबर और 2015 में सितंबर से दिसंबर के दौरान पंचायत चुनाव हुए थे। इस बार भी पंचायत चुनाव पिछले साल दिसंबर में होने तय थे लेकिन कोरोना और परिसीमन के चलते इसमें देरी हुई लेकिन अब हाई कोर्ट इसे और टालने के मूड में नहीं है।

मार्च-अप्रैल में चुनाव से क्यों बचती हैं सरकारें
दरअसल राज्य सरकारें और निर्वाचन आयोग दोनों ही इन महीनों में पंचायत चुनाव कराने से बचते रहे हैं। इसके पीछे वजह है कि वित्तीय वर्ष होने का आखिरी महीना होने की वजह से सरकारी कर्मियों के पास में अधिक व्यस्तता रहती है। वहीं रबी की फसलों की कटाई होने की वजह से किसान भी खाली नहीं रहते हैं।

आयोग ने मांगी थी 60 दिन की मोहलत
चुनाव आयोग ने हाई कोर्ट में जो कार्यक्रम पेश किया था, उसमें चुनाव मई तक होने की बात थी। राज्य निर्वाचन आयोग ने पंचायत चुनाव के लिए हाई कोर्ट से 60 दिन की मोहलत मांगी थी लेकिन हाई कोर्ट के आदेश के बाद अब इसे 42 से 45 दिनों में ही पूरा कराने का कार्यक्रम तय किया जा रहा है।

पंचायतीराज विभाग ने लगा दी नोटिस
हालांकि आरक्षण प्रक्रिया की डेडलाइन को लेकर पेच फंसता नजर आ रहा है। मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो कई जगहों में अभी आरक्षण प्रक्रिया शुरू भी नहीं हुई है। यहां तक कि पंचायतीराज विभाग ने भी आरक्षण को लेकर चुप्पी साध ली है और कार्यालय की दीवार पर नोटिस लगाया गया है कि अभी आरक्षण के बारे में कोई पूछताछ न करें।

इन सीटों का होगा आरक्षण
उत्तर प्रदेश में इस बार होने वाले पंचायत चुनाव में ऐसे क्षेत्र और जिला पंचायतें अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित की जाएंगी जो पिछले पांच चुनाव में अब तक कभी आरक्षित ही नहीं हो सकीं। राज्य सरकार पंचायतीराज निदेशालय से मिले आंकड़ों और प्रस्तावों के आधार पर कुछ ऐसा ही फॉर्म्युला तैयार करवाने में जुटी है।
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