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यूपी के किसानों ने बना दिया नया रिकॉर्ड, जानकर आप भी होंगे हैरान



लखनऊ। मॉनसून के मेहरबान रहने से उत्तर प्रदेश के किसानों ने इस साल खरीफ फसलों के उत्पादन का नया रेकॉर्ड बनाया है। यूपी में पिछले खरीफ वर्ष में जहां 207.61 लाख टन अनाज का उत्पादन हुआ था। वहीं इस खरीफ वर्ष में अनाज का उत्पादन 211.42 लाख टन पहुंच गया है। चावल की पैदावार भी यूपी में पिछले साल के मुकाबले इस साल ज्यादा हुई है। पिछले साल यूपी में चावल का उत्पादन 169.48 लाख टन था, जो इस साल बढ़ कर 171.36 लाख टन पहुंच गया है। यूपी के किसानों ने चावल ही नहीं मोटे अनाजों (मक्के को छोड़ कर) के साथ दलहन-तिलहन का उत्पादन भी बढ़ाया है।

दलहन और तिलहन का उत्पादन भी बढ़ा
कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने बताया कि अनुकूल मौसम और अच्छी बरसात के चलते इस साल दलहन का उत्पादन पिछले साल की तुलना में 0.70 लाख टन अधिक हुआ। इस साल उड़द 2.82 लाख टन और मूंग 0.15 लाख टन का उत्पादन किया गया। जबकि, तिलहन के उत्पादन में पिछले साल की अपेक्षा 0.82 लाख टन की वृद्धि हुई। इस साल तिल का उत्पादन 0.98 लाख टन, मूंगफली 1.10 लाख टन और सोयाबीन का उत्पादन 0.39 लाख टन रहा।

50 लाख टन ही है भंडारण की क्षमता
खरीफ फसलों का उत्पादन बढ़ने से यूपी में धान और मोटे अनाज के भंडारण की समस्या सामने आ सकती है। यूपी में वर्तमान में भंडारण क्षमता पचास लाख टन के करीब है और इस साल अब तक यूपी सरकार 62 लाख टन धान की ही खरीद कर चुकी है। सहकारिता मंत्री मुकुट बिहारी वर्मा का कहना है कि सरकार लगातार भंडारण की क्षमता बढ़ा रही है।

2017 में यहां भंडारण की कुल क्षमता 29 लाख टन के करीब थी, जिसे सरकार ने चार साल में बढ़ा कर करीब 50 लाख टन से अधिक कर दिया है। सरकार का लक्ष्य 2022 तक भंडारण की क्षमता बढ़ाकर 70 लाख टन करने की है। हालांकि, सरकार अपने भंडारण गृहों के अलावा जरूरत के हिसाब से किराए पर निजी गोदाम भी लेती रही है।

पिछले तीन सालों में खरीफ फसलों का उत्पादन (लाख टन में)

अनाज 2020-21 2019-20 2018-19
चावल 171.36 169.48 159.32
मक्का 16.36 16.41 13.92
ज्वार 2.32 2.27 1.84
बाजरा 21.39 19.39 17.99

प्रदेश में अनाज उत्पादन में लगातार वृद्धि से यह पता चलता है कि किसान संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल कर रहे हैं। इस सबके बीच जरूरत है कि किसानों को बाजार के नए आयामों से जोड़कर खाद्य प्रसंस्करण के लिए आकर्षित किया जाए। साथ ही मार्केटिंग के गुर सिखाकर बाजार तक उनकी पहुंच को आसान किया जाए। सरकारी तंत्रों के प्रयास को ज्यादा से ज्यादा किसानों तक पहुंचाने के लिए सम्मिलित प्रयास की जरूरत है, ताकि उन्हें अपनी मेहनत का ज्यादा से ज्यादा लाभ मिल सके।
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