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नोट छापने की मशीन समझती है दीदी, सुबह से रात तक कराती है…




इंदौर। दुबली-पतली कदकाठी और छोटी-छोटी आंखों वाली वो युवती रात तीन बजे पुलिसवालों के तीखे सवालों का सामना कर रही थी। बगैर संकोच जवाब देते हुए कहा कि साहब मैंने मजबूरी में ‘काम’ शुरू किया है। मेरी तीन साल की बेटी है जिसे दूसरों के पास छोड़कर आई हूं। दीदी (एजेंट) मुझे 60 हजार रुपये महीना देने का बोलकर लाई थी। वह सुबह से रात तक काम करवाती थी।

राजघाट खुलना (बांग्लादेश) से भारत लाई इस युवती को एमआइजी पुलिस ने शुक्रवार रात श्रीनगर की एक इमारत से छह अन्य लड़कियों के साथ मुक्त करवाया था। महिला अफसरों ने जब पूछताछ की तो उसने बताया कि माता-पिता बुजुर्ग हो चुके हैं। कम उम्र में शादी कर दी और बेटी होते ही पति छोड़कर चला गया। भारत-बांग्लादेश के बीच संगठित गिरोह चलाने वाले बाबू भाई ने कहा कि तुझे इंदौर भेज देता हूं। मेरे पास इसके अलावा कोई रास्ता नहीं था। बच्ची पड़ोसियों को सौंप दी और कहा कि मैं कुछ दिनों के लिए भारत जा रही हूं। सीमा पार करवाने के लिए बाबू भाई धान के खेतों में लेकर आया और गंदे कपड़े पहना दिए। सुरक्षाकर्मियों के खाना खाने के समय मुझे भारत भेज दिया। उसके पास दो सिम है। एक से भारतीय एजेंटों से बात करता है। मैं ट्रेन में बैठकर इंदौर आ गई। मुझे 60 हजार रुपये महीने देने का बोला था। 15 दिन काम होता था, 30 हजार रुपये ही मिलते थे। एक दिन में 10-10 लोग आते थे।

बांग्लादेशी युवती के ठीक बगल में बैठी 28 वर्षीय युवती की आखें भर आईं, लेकिन आंसू छिपाते हुए बोली- छोटी बहन को पालने की जिम्मदारी है। सबसे पहले एक अंकल के पास मुंबई गई थी। धीरे-धीरे संपर्क बढ़ता गया और गुजरात, महाराष्ट्र, दिल्ली, नोयडा सहित कई शहरों से मांग आने लगी। अब तो फ्लाइट से आना-जाना करती हूं। पुलिस के मुताबिक, इन अनैतिक कारोबार में लिप्त युवतियों का अधिकृत आंकड़ा तो नहीं पता, लेकिन बयानों से लगता है कि पूरे शहर में देह व्यापार के अड्डे बन चुके हैं। खासकर महालक्ष्मी नगर, खंडवा रोड, राजेंद्र नगर, बाणगंगा, स्कीम-78, भंवरकुआं, बंगाली चौराहा और कनाड़िया रोड जैसे इलाकों में कई महिलाएं गरीबी का फायदा उठाकर लड़कियों को देह व्यापार में धकेल रही हैं।
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