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सोनू सूद को मिली सुप्रीम कोर्ट से राहत, BMC को एक्टर पर कार्रवाई न करने का आदेश


सोनू सूद

बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) की तरफ से अभिनेता सोनू सूद (Sonu Sood) को दिए गए नोटिस के मामले पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने राहत दे दी है. सुप्रीम कोर्ट ने बृहन्मुंबई महानगरपालिका से कहा है कि सोनू सूद के खिलाफ फिलहाल कोई कार्रवाई ना की जाए. वहीं, सोनू सूद की तरफ से कहा गया है कि वह सुप्रीम कोर्ट से अपनी याचिका वापस ले रहे हैं और बीएमसी के पास विवाद सुलझाने के लिए जा रहै हैं. चीफ जस्टिस एसए बोबडे ने कहा कि यह अच्छा कदम है.

चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया एसए बोबडे, एएस बोपन्ना और वी रामासुब्रमण्यम की बेंच द्वारा सोनू सूद की याचिका पर सुनवाई की गई और उन्होंने इस मामले पर अपना फैसला सुनाया. बता दें कि बीएमसी द्वारा सोनू सूद को जुहू स्थित आवासीय इमारत में कथित अवैध निर्माण करने को लेकर नोटिस दिया गया था. इस नोटिस के खिलाफ सोनू सूद ने बॉम्बे हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया, लेकिन उन्हें वहां से राहत नहीं मिली, जिसके बाद अभिनेता ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था.
सोनू ने याचिका में कही थी ये बात

सोनू सूद ने बॉम्बे हाई कोर्ट के उस फैसला के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की थी, जिसमें उन्हें अवैध निर्माण का दोषी पाया गया था. सोनू सूद और उनकी पत्नी ने अपने वकील वीनीत द्वारा जो सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की थी, उसमें कहा गया कि याचिकाकर्ताओं ने पहले ही इंटरनल रेनोवेशन के काम को रोक दिया है, जिसके लिए महाराष्ट्र क्षेत्रीय और नगर नियोजन अधिनियम, 1966 की धारा 43 के प्रावधानों के अनुसार कोई अनुमति की आवश्यकता नहीं है. इसके साथ ही याचिका में यह भी कहा गया है कि जो रेनोवेशन बिल्डिंग में किया गया है उसे बीएमसी द्वारा ध्वस्त किए जाने से रोका जाए.

बताते चलें कि बीएमसी ने अपने नोटिस में सोनू सूद पर आरोप लगाया था कि अभिनेता ने शक्ति सागर रिहायशी इमारत, जो कि छह मंजिला है, उसमें ढांचागत बदलाव करके उसे कमर्शियल होटल बना दिया है. इस मामले में सोनू सूद ने अपनी सफाई भी पेश की थी. अभिनेता ने यह स्पष्ट किया था कि उन्होंने बदलाव को लेकर बीएमसी से इजाजत ली थी. वह केवल महाराष्ट्र कोस्टल जोन मैनेजमेंट अथॉरिटी से मंजूरी मिलने का इंतजार कर रहे थे.

खुद पर लगे आरोपों पर सोनू सूद ने कहा था कि उन्होंने जुहू स्थित अपने आवासीय इमारत को लेकर कोई भी अनियमितता नहीं बरती थी. मैंने हमेशा से कानून का पालन किया. महामारी के समय में इस इमारत को कोरोना वॉरियर्स के रहने की जगह के रूप में इस्तेमाल किया गया था.
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