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भारतीय वैक्सीन पर चीन की नजर, फार्मूला चुराने में जुटा, निशाने पर…




नई दिल्ली: भारत सीमा पर पड़ोसी मुल्क से जंग हो या देश के अंदर कोरोना वायरस से लड़ाई हो, हर मोर्चे पर जीत के करीब होता जा रहा है। वहीं चीन को भारत की ये सफलता रास नहीं आ रही। भले ही चीन में पूर्वी लद्दाख में सीमा तनाव के बीच भारतीय सेना के सख्त रुख के सामने घुटने टेक लिए हों लेकिन उनकी चालें चलने की आदत नहीं जा रही।

चीन के हैकर्स ने दो भारतीय वैक्सीन निर्माता कंपनियों को किया टारगेट
जानकारी मिली है कि चीन की नजर अब भारतीय कोरोना वैक्सीन पर हैं। इसके लिए चीन के हैकर्स ने भारत बायोटेक और सीरम को निशाना बना है। लगातार इस तरह की खबर सामने आती रही हैं कि चीन का साइबर सेक्टर भारतीय प्रतिष्ठानों की निगरानी कर रहा है। वहीं अब ताजा रिपोर्ट्स के मुताबिक जानकारी दी गयी कि चीन के सरकारी हैकरों के समूह ने हालिया हफ्तों में दो भारतीय वैक्सीन निर्माता कंपनियों के आईटी सिस्टम को टारगेट किया है।

बायोटेक-सीरम से वैक्सीन का फार्मूला चुराने की कोशिश
साइबर इंटेलिजेंस फर्म साइफर्मा के हवाले से कहा गया कि भारत की जिन दो कंपनियों को चीन टारगेट कर रहा है, उनकी बनाई वैक्सीन देश में जनवरी से इस्तेमाल हो रहीं हैं। इससे साफ़ है कि सीरम इंस्टिट्यूट और भारत बायोटेक पर चीन की नजर हैं।

चीन का ये है असली मकसद
वहीं सिंगापुर और टोकियो स्थित गोल्डमैन सैक्स समर्थित साइफर्मा ने कहा, “चीनी हैकरों के समूह APT10 (स्टोन पांडा) ने भारतीय वैक्सीन निर्माता कंपनियों सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया और भारत बायोटेक के आईटी इंफ्रास्ट्रक्चर और सप्लाई चेन सॉफ्टवेयर में खामी और कमजोरी की पहचान की है।”
बता दें कि सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया दुनिया की सबसे बड़ी वैक्सीन निर्माता कंपनी है। साइफर्मा के चीफ एग्जीक्यूटिव ऑफिसर कुमार रितेश के मुताबिक चीनी हैकर की मंशा भारतीय दवा निर्माता कंपनियों के साथ प्रतिस्पर्धा में बढ़त हासिल करना है।

भारत के पॉवर सप्लाई पर सायबर अटैकर्स
इसके पहले मीडिया रिपोर्ट्स में ये भी कहा जा रहा था कि चीन के सायबर अटैकर्स का निशाना भारत के पॉवर सप्लाई पर भी है। इस बारे में सामने आई एक रिपोर्ट में ये दावा किया गया है कि सरकार द्वारा चलाए जा रहे कम से कम 12 संस्थान चीनी हैकर्स के निशाने पर थे। जिनमें से मुख्य रूप से पॉवर यूटिलिटी और उनके लोड डिस्पैच सेंटर्स शामिल हैं। ऐसे में साल 2020 के बीच में चीनी सरकार के समर्थन वाले कुछ समूहों ने मालवेयर इंजेक्ट करने की कोशिश की थी। इसी कड़ी में चीनी हैकर्स की कोशिश ये थी कि वह भारत में बड़ा पावर कट कर सकें।
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