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कोरोना की गंभीरता को भांपे दिल्ली के ये बड़े बाजार, उठाए ये बड़े कदम…



नई दिल्ली। सालभर पहले कोरोना एक नाम था और इससे पीडि़त होने वाले चंद आंकड़े साथ में आने लगे थे। लोगों में इसे लेकर डर पैदा होने लगा था। पर इस भयावहता का अंदाजा नहीं था, जो आज मंजर सामने है। इस स्थिति में भी दिल्ली के बाजारों ने कोरोना संकट की आहट को पहले से पहचान लिया था तथा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पिछले वर्ष 22 मार्च को जनता कफ्र्यू के आह्वान के एक दिन पहले यानि 21 मार्च से ही बाजारों को स्वत: स्फूर्त तीन दिनों के लिए बंद कर दिया था।
बाजार बंद का आह्वान कंफेडरेशन आफ आल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) ने किया था, जिसमें दिल्ली के तकरीबन सभी कारोबारी संगठनों का साथ मिला था। वहीं, कई बाजार तो उसी दिन से अनलाक के दौर तक बंद रहे थे। इस संबंध में कैट दिल्ली के महासचिव देवराज बवेजा कहते हैं कि तब कोरोना की खबरें आने लगी थी, इससे डर का माहौल बनने लगा था। व्यापारियों में भी ¨चता का माहौल था।

ऐसे में हम लोगों ने व्यापारियों को डरने की जगह सचेत रहने को लेकर जागरूक करना शुरू कर दिया था। उन्हें बताया जाने लगा था कि यह लड़ाई लंबी है और उसे उसी तरह से लड़नी होगी। हालत यह कि 21 मार्च को ही चांदनी चौक, खारी बावली, दरीबा कलां, कश्मीरी गेट, करोलबाग, पटेल नगर, दरियागंज व चावड़ी बाजार समेत अन्य बाजारों में सन्नाटा पसर गया था। यह जनता कफ्र्यू के अगले दिन भी था।

इसके साथ ही दुकानदार लाकडाउन के लिए मानसिक रूप से तैयार होने लग गए थे। द बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन, कूचा महाजनी के अध्यक्ष योगेश सिंघल उस दिन को याद करते हुए बताते हैं कि जब बाजार बंद का आह्वान किया गया था तो इसपर सवाल उठाने वाले भी कम नहीं थे। पर आज की स्थिति देखकर लगता है कि हम लोग सही थे। हालांकि, इससे काफी आर्थिक नुकसान हुआ, लेकिन सही समय पर लाकडाउन की घोषणा से हम दूसरे देश के मुकाबले कोरोना की भयावहता को कम कर सके हैं।
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