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पुरानी गाड़ियों का वक्त हुआ खत्म, सरकार बना रही ये सख्त नियम, पड़ेंगे बहुत भारी




नई दिल्ली: देश में अब पुराने वाहनों का समय ख़त्म होने को है। सरकार अब एक नई नीति लेकर आई है जिसके तहत किसी भी वाहन की उम्र तय कर दी गयी है। अब ऐसा नहीं होगा कि बीसों साल पुरानी गाड़ी चलती रहे। अगर पुरानी गाड़ी चलानी ही है तो उसके उसके लिए गाड़ी एकदम फिट रखनी होगी और कीमत भी तगड़ी चुकानी होगी। सरकार का कहना है कि इससे सड़क सुरक्षा में सुधार, वायु प्रदूषण में कमी और तेल आयात में कमी आएगी।

केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने लोकसभा में ‘व्हीकल स्क्रैपिंग पॉलिसी’ को लेकर बड़ा ऐलान किया है। इस पॉलिसी में पुराने वाहन को कबाड़ यानी स्क्रैप कर नया वाहन खरीदने वालों को कई प्रकार की टैक्स छूट और प्रोत्साहन का प्रस्ताव किया गया है। साथ ही पुराने गाड़ियों को सड़कों से हटाने के लिए कई प्रावधान किए गए हैं।

फिटनेस में फेल तो कबाड़ होगी गाड़ी
प्रस्तावित पॉलिसी के मुताबिक, ऐसी गाड़ियां जो फिटनेस टेस्ट में फेल हो जाएंगी या जिनका दोबारा रजिस्ट्रेशन नहीं होगा, उनको एंड ऑफ लाइफ व्हीकल घोषित कर दिया जाएगा। यानी ऐसी गाड़ियों को सड़कों पर नहीं चलाया जा सकेगा। उनकी उम्र समाप्त मानी जायेगी। गडकरी के मुताबिक पॉलिसी में 15 साल पुराने कमर्शियल गाड़िकों को फिटनेस सर्टिफिकेट पाने में विफल रहने पर डी-रजिस्टर करने का प्रस्ताव रखा गया है। इसके अलावा 15 साल से ज्यादा पुरानी गाड़ियों को फिटनेस टेस्ट कराने के लिए भी ज्यादा टैक्स देना होगा। पॉलिसी के मुताबिक, 20 साल पुरानी ऐसी निजी गाड़ी जो फिटनेस टेस्ट पास नहीं कर पायेगी या दोबारा रजिस्ट्रेशन नहीं कर पायेगी उनको डी-रजिस्टर किया जाएगा। यानी उनका पहले का रजिस्ट्रेशन पूरी तरह से समाप्त कर दिया जाएगा, ताकि वे सड़क पर चलने योग्य ना रहें।

ऑटोमोबाइल क्षेत्र
नितिन गडकरी ने कहा है कि देश में ऑटोमोबाइल क्षेत्र का आकार 4.50 लाख करोड़ रुपये का है और अगले पांच वर्षों में इसके बढ़कर 10 लाख करोड़ रुपये का होने की उम्मीद है। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि नई नीति को जर्मनी, ब्रिटेन, जापान जैसे देशों के विश्वस्तरीय मानकों के आधार पर तैयार किया गया है। इसे आम लोगों के सुझावों के लिए 30 दिनों तक सार्वजनिक रखा जाएगा।

उन्होंने कहा कि इस नीति के दायरे में 20 साल से ज्यादा पुराने लगभग 51 लाख हल्के मोटर वाहन (एलएमवी) और 15 साल से अधिक पुराने 34 लाख अन्य एलएमवी आएंगे। इसके तहत 15 लाख मध्यम और भारी गाड़ियां भी आएंगी जो 15 साल से ज्यादा पुरानी हैं और वर्तमान में इनके पास फिटनेस प्रमाण पत्र नहीं है। अगर फिट वाहनों की तुलना में पुराने हो चुके वाहनों की तुलना की जाए तो पुराने वाहन 10 से 12 गुना ज्यादा प्रदूषण फैलाते हैं जो बेहद खतरनाक साबित होता है।

वाहन मालिकों को फायदे
नई नीति के अनुसार पुराने वाहन को स्क्रैप करने पर वाहन मालिकों को एक सर्टिफिकेट दिया जाएगा। इस सर्टिफिकेट को दिखाकर नया वाहन खरीदने पर 5% की छूट मिलेगी। यह छूट ऑटो कंपनियां देंगी।

नया वाहन खरीदने वालों को रजिस्ट्रेशन फीस नहीं देनी होगी। निजी इस्तेमाल के लिए नया वाहन खरीदने पर रोड टैक्स में 25 फीसदी की छूट मिलेगी। जबकि कमर्शियल वाहन खरीदने वालों को रोड टैक्स में 15फीसदी की छूट मिलेगी। स्क्रैप किए जाने वाले वाहन की वैल्यू नए वाहन की एक्स-शोरूम कीमत के आधार पर होगी। स्क्रैप किए जाने वाले वाहन की वैल्यू एक्स-शोरूम प्राइस की 4 से 6 फीसदी हो सकती है।

एक अक्टूबर से नए नियम
फिटनेस टेस्ट और स्क्रैपिंग सेंटर से जुड़े नियम एक अक्टूबर 2021 से लागू होंगे। वहीं, सरकारी और सार्वजानिक उपक्रमों से जुड़े 15 साल पुराने वाहनों को स्क्रैप करने वाले नियम एक अप्रैल 2022 से लागू होंगे। कमर्शियल वाहनों के लिए आवश्यक फिटनेस टेस्टिंग से जुड़े नियम एक अप्रैल 2023 से लागू होंगे।

सबसे बड़ा हब बनेगा भारत
नितिन गडकरी ने कहा है कि इस पॉलिसी से भारत अगले पांच साल में ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरिंग का सबसे बड़ा हब बनेगा। उन्होंने कहा कि अगले 1 साल में 100 फीसदी लिथियम ऑयन बैटरी बनेंगी। अगले 2 साल में दो से 4 वाट वाली इलेक्ट्रिक वाहन की कीमत पेट्रोल-वर्जन वाली कार के बराबर होगी। इस पॉलिसी से स्क्रैपिंग सेंटर, पुर्जा निर्माता और ऑटो कंपोनेंट इंडस्ट्री को फायदा मिलेगा। प्लास्टिक, कॉपर, एल्युमीनियम स्टील की रीसाइक्लिंग होने से लागत में कमी आएगी। इस पॉलिसी से ऑटोमोबाइल कंपोनेंट में आने वाले खर्च में भी 40 फीसदी की कमी आ सकती है।

हटाए जाएंगे टोल बूथ
नितिन गडकरी ने ये भी कहा है कि देश के 93 फीसदी वाहन फस्टैग का उपयोग कर टोल का भुगतान करते हैं, लेकिन शेष 7 प्रतिशत वाहनों ने दोगुने टोल का भुगतान करने के बावजूद फास्टैग नहीं लगवाया है। उन्होंने कहा कि एक वर्ष के भीतर देश के सभी फिजिकल टोल बूथ हटा दिए जाएंगे। इसका मतलब ये है कि टोल संग्रह जीपीएस के माध्यम से होगा। धनराशि जीपीएस इमेजिंग के आधार पर एकत्र की जाएगी। जितना आप सड़क का इस्तेमाल करेंगे उतना ही टोल लिया जाएगा।
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