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कुत्ते का हुआ DNA टेस्ट जिसने सुलझा दी सारी गुत्थी, महीनों का झगड़ा खत्म



होशंगाबाद: होशंगाबाद से बहुत ही हैरान कर देने वाला वाकया सामने आया है। अभी तक आपने सुना होगा कि नवजात बच्चे और जायदाद बदलने के विवादों में डीएनए(DNA) टेस्ट होता है, लेकिन यहां तो मामला ही कुछ और था। एक कुत्ते को लेकर हुआ झगड़ा डीएनए(DNA) टेस्ट के बाद सुलझा। डीएनए की टेस्ट रिपोर्ट आने के बाद ये तय हुआ कि इस कुत्ते का मालिक आखिर कौन है। जबकि इस कुत्ते के मालिकाना हक के दावे को लेकर बीते 4 महीने से दो लोगों के बीच झगड़ा चल रहा था।

कुत्ते के खून का सैंपल
दरअसल होशंगाबाद के देहात थाने में पिछले साल नवंबर के महीने में एक दिलचस्प मामला सामने आया था। यहां एक लैब्राडोर नस्ल के कुत्‍ते पर दो लोग जिनका नाम शादाब खान और कृतिक शिवहरे हक जता रहे थे। जिनमें से पेशे से पत्रकार शादाब खान का कहना था कि वह इसे पचमढ़ी से लेकर आए थे। जबकि दूसरी तरफ एबीवीपी से जुड़े कार्तिक शिवहरे ने बताया कि वह कुत्ते को बाबई से खरीद कर लाए थे। बता दें, दोनों स्थान होशंगाबाद जिले में हैं। जिसके बाद पुलिस की समस्या तब बढ़ गई जब कुत्ते ने दोनों मालिकों से पहचान दिखाई। ऐसे में पुलिस ने पहले तो कई तरीकों से झगड़ा सुलझाने की कोशिश की, पर जब मामला नहीं सुलझा तो तय हुआ कि कुत्ते का डीएनए टेस्ट कराया जाए। इसके चलते वेटेनरी डॉक्टर ने कुत्ते के खून का सैंपल लिया और शादाब खान के दस्तावेज़ों के आधार पर इस लैब्राडोर कुत्ते को जन्म देने वाली डॉगी के खून के नमूने जांच के लिए हैदराबाद की लेबोरेटरी भेज दिया।

डॉग का मालिक शादाब खान
फिर हैदराबाद से आई डीएनए रिपोर्ट के बाद देहात थाना प्रभारी अनूप सिंह ने बताया कि 2020 का प्रकरण था। इस टेस्ट रिपोर्ट में यह स्पष्ट हुआ है कि डॉग का मालिक शादाब खान हैं। मामले में जो भी विधि संगत कार्रवाई होगी वो की जाएगी। इस मामले में शादाब खान का कहना था कि उनका कोको नाम का काले रंग का कुत्ता अगस्त में खो गया था। उन्होंने पुलिस में रिपोर्ट भी की थी। लेकिन पुलिस ने इसकी पुष्टि नहीं की। आगे बताते हुए शादाब खान ने इस बीच पुलिस को फोन करके सूचना दी कि उनका लापता कुत्ता उन्होंने कृतिक शिवहरे के घर पर देखा है। उन्होंने कुत्ते का रजिस्ट्रेशन पुलिस को दिखाया। लेकिन शिवहरे का कहना था ये कोको नहीं टाइगर है और वो इसे 11 अगस्त को बाबई से खरीद कर लाए थे। इन सब के बीच अच्छी बात तो यह थी कि कोको दोनों मालिकों से घुल-मिल गया था। जिससे पता कर पाना बेहद मुश्किल था कि ये कोको है या टाइगर।
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