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भारत बनाम पाकिस्तान वो मैच जब देश में था कर्फ्यू जैसा महौल क्योंकि सचिन जवाबी हमला कर रहे थे..*



1 मार्च, शनिवार का दिन। पूरे देश में त्योहार का माहौल था। तैयारियां एक दिन पहले से शुरू हो गई थी। हर कोई इस पल का गवाह बनना चाह रहा था। सभी जरूरी काम पहले ही निपटा लिए गए थे ताकि कोई घर से एक कदम भी बाहर न निकाले। छुट्टियों की अर्जी ऑफिस में जा चुकी थी और जिन्हें नहीं मिला वो दफ्तर में ही बंदोबस्त जमा लिया। उस दिन देश में कर्फ्यू जैसा माहौल था। नहीं, कहीं कोई हिंसा नहीं हुई थी लेकिन खून हर किसी का उबाल मार रहा था। उस दिन सचिन कमाल कर रहे थे।

मौका था भारत और पाकिस्तान के बीच विश्व कप के सबसे रोमांचक मुकाबले की। तीन साल से लोग इस मुकाबले का इंतजार कर रहे थे। इंतजार इसलिए भी था क्योंकि पाकिस्तान की तेज गेंदबाजी उस वक्त चरम पर थी। एक तरफ शोएब अख्तर की तेजी थी तो दूसरी तरफ असीम अकरम और वकार युनिस की लहराती गेंद जिसमें तड़का लगा रहे थे अब्दुर रज्जाक।

पाकिस्तान की पारी और अनवर का शतक

टॉस जीतकर वकार ने पहले बल्लेबाजी का फैसला किया और भारत के खिलाफ हमेशा बेहतर खेलने वाले सईद अनवर ने इसे सही साबित कर दिया। भले ही भारतीय गेंदबाजी बीच बीच में विकेट निकाल रहे थे लेकिन अनवर अलग ही रंग में दिख रहे थे। उन्होंने 101 रनों की बेहतरीन पारी खेली। आशीष नेहरा ने उन्हें बोल्ड कर भारत की वापसी कराई। आखिरी में युनिस खान(32) और राशिद लतीफ(29) ने टीम को सात विकेट पर 273 रनों तक पहुंचा दिया जो उस वक्त एक मैच जिताऊ स्कोर माना जाता था।

‘रन’भूमी में सचिन का पहला वार

भारत को 274 रन बनाने के लिए तीन दिग्गज गेंदबाजों की चक्रव्यूह को भेदना था। और इसका बीड़ा उठाया टीम के अर्जुन सचिन तेंदुलकर ने। सचिन मूड में थे और अपने जोड़ीदार वीरेन्द्र सहवाग से साफ कह दिया कि आज स्ट्राइक वो लेंगे। लेग स्टंप का गार्ड लेकर सचिन ने ऑफ साइड को अपने निशान पर रखा और अकरम के पहले ही ओवर में चौके के साथ खाता खोला। लेकिन खेल बदला दूसरे ओवर की तीसरी गेंद पर। लंबे रन अप के साथ शोएब गेंदबाजी के लिए आए और सचिन को अपने तेज बाउंसर से डराने की कोशिश में थे लेकिन फिर सचिन का बल्ला ऐसा चला कि मैच का नक्शा ही बदल गया। जब तक क्रिकेट रहेगा तब तक इस शॉट की चर्चा होती रहेगी।



सचिन को मिला जीवनदान

सचिन के रंग में सहवाग भी रम चुके थे और वकार को वैसा ही छक्का लगाया। लेकिन छठे ओवर में पाकिस्तान ने वापसी कर ली। वकार के बनाए चक्रव्यूह में पहले सहवाग(14 गेंद 21 रन) फंसे फिर कप्तान सौरव गांगुली(0)। तीन गेंद के अंदर भारत दो विकेट गंवा चुका था। पाकिस्तान वापसी की कोशिश में था लेकिन तभी रज्जाक से वो गलती हो गई जो आज भी उन्हें सताती होगी। अकरम की गेंद पर उन्होंने सचिन का कैच शॉर्ट मिड ऑन पर ड्रॉप कर दिया। जीवनदान सचिन को मिला था और सांस करोड़ों की भारतीयों की वापस आई थी। कैफ(35) के साथ सचिन ने तीसरे विकेट के लिए 102 रनों की साझेदारी कर भारत को मैच में बनाए रखा।

शतक से चूके सचिन

लेकिन इसके बाद सचिन का एक और संघर्ष शुरू हुआ। इस बार गेंद की जगह उन्हें अपने दर्द से लड़ना था। क्रैंप के कारण सचिन दौड़ने में असमर्थ थे और करियर में पहली बार रनर का इस्तेमाल करना पड़ा। जब लग रहा था सचिन एक और शतक अपने खाते में जोड़ लेंगे उसी वक्त अख्तर का नसीब चमक गया। दर्द के परेशान सचिन 28वें ओवर की चौथी गेंद पर अख्तर के बाउंसर पर आउट हो गए। भले ही सचिन 98(75 गेंद 12 चौका 1 छक्का) पर आउट हुए लेकिन उनकी ये पारी कईयों के शतक पर भारी था। मैदान पर पाकिस्तान के लिए जश्न का ये आखिरी मौका था। इसके बाद राहुल द्रविड़ (नाबाद 44) और युवराज सिंह(नाबाद 50) ने भारत को 26 गेंद पहले सात विकेट से शानदार जीत दिला दी।

मैन ऑफ द मैच के समय स्टेडियम में सिर्फ एक नाम गूंज रहा था, सचिन…सचिन…सचिन… भले ही इस मुकाबले को डेढ़ दशक से अधिक का समय बीत गया हो लेकिन यादें अभी भी ताजा है।
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