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बिहार में जमीन की रजिस्ट्री के बाद दाखिल-खारिज क्यों है ज़रूरी


बिहार में अप्रैल माह से जमीन की रजिस्ट्री के साथ ही म्यूटेशन यानि की दाखिल-ख़ारिज भी किया जा रहा हैं। इससे पहले रजिस्ट्री और दाखिल-खारिज अलग-अलग हुआ करती थी। आज इसी विषय में जानने की कोशिश करेंगे की जमीन की रजिस्ट्री के बाद दाखिल-खारिज क्यों ज़रूरी हैं।

बिहार में जमीन की रजिस्ट्री के बाद दाखिल-खारिज क्यों है ज़रूरी।

1 .बिहार में जमीन की रजिस्ट्री के बाद जब दाखिल-खारिज किया जाता हैं तो जमीन के पुराने मालिक का नाम रद्द कर दिया जाता हैं और नए मालिक का नाम रिकॉर्ड में लिखा जाता हैं।

2 .बता दे की जमीन की दाखिल-खारिज नए मालिक का आधिकारिक स्वामित्व है जो सरकारी रिकॉर्ड में पंजीकृत किया जाता हैं।

3 .नई व्यवस्था के तहत रजिस्ट्री ऑफिस से दस्तावेज की कापी अपने आप अंचल के राजस्व कर्मी की पहुंच में आ जाता हैं और स्वतः की जमीन की दाखिल-ख़ारिज होता हैं।

4 .बता दें की जमीन दाखिल-खारिज की नई व्यवस्था का लाभ उन्हें मिल रहा है जो जमाबंदीदार रैयत (जिनके नाम से जमाबंदी कायम है।) से जमीन की खरीद करेंगे।

5 .बिहार में ऐसे जमीन विक्रेता जिनके नाम से जमाबंदी कायम नहीं है। रसीद नहीं कटता है। उनसे जमीन खरीदने पर पहले की तरह म्यूटेशन के लिए ऑनलाइन आवेदन करना होता हैं।  निचे दी गयी ये खबरें भी जरूर पढ़ें
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